: सरकारी स्कूलों में भी अब पहली बार आयोजित होंगे प्री-बोर्ड परीक्षाएं
Thu, Nov 14, 2024
छत्तीसगढ़ सरकार ने निजी स्कूलों की तर्ज पर अब सरकारी स्कूलों में भी प्री-बोर्ड परीक्षाएं आयोजित करने का निर्णय लिया है। सरकार ने एक आदेश जारी किया है, जिसके तहत अब सभी हाई और हायर सेकंडरी सरकारी स्कूलों में 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा से पहले, जनवरी के तीसरे सप्ताह में प्री-बोर्ड परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। इसका उद्देश्य परीक्षा परिणामों में सुधार लाना है, ताकि सरकारी स्कूलों के छात्र भी प्रतिस्पर्धात्मक रूप से मजबूत हो सकें।
निजी और सरकारी स्कूलों के बीच अंतर को खत्म करने का प्रयास
अक्सर देखा गया हैकि निजी स्कूल परीक्षा परिणामों को सुधारने के लिए विभिन्न उपाय अपनाते हैं,जिससे उनके छात्र अच्छे परिणाम प्राप्त करते हैं।दूसरी ओर, सरकारी स्कूलों में ऐसे उपाय नहीं अपनाए जाते, जिससे कई बार छात्र पीछे रह जाते हैं।इसी अंतर को समाप्त करने के लिए सरकार ने अब सरकारी स्कूलों में भी प्री-बोर्ड परीक्षाएं अनिवार्य कर दी हैं।
सभी DEO को सिलेबस पूरा करने का निर्देश
प्री-बोर्ड परीक्षा की तैयारी के तहत राज्य के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEOs) को निर्देश दिया गया हैकि वे 10वीं और 12वीं कक्षाओं का सिलेबस 10 जनवरी तक पूरा कर लें।इस आदेश में सभी स्कूलों को तुरंत तैयारी शुरू करने के लिए कहा गया है।प्रत्येक DEO को अब समय रहते परीक्षा की समय सारणी निर्धारित करनी हैऔर प्रश्न पत्रों की तैयारी के लिए एक विषयवार समिति बनानी होगी।
प्रश्न पत्र निर्माण के लिए समिति गठन और विशेषज्ञों की सलाह
बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन द्वारा निर्धारित ब्लूप्रिंट के अनुसार प्रश्न पत्र तैयार किए जाएंगे।प्रश्न पत्र निर्माण समिति के सदस्यों को विषय विशेषज्ञों द्वारा ब्लूप्रिंट पर प्रशिक्षण दिया जाएगा,जिससे परीक्षा में विद्यार्थियों को अधिकतम लाभ मिल सके। इस समिति में विषय विशेषज्ञों को शामिल करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है,ताकि प्रश्न पत्र गुणवत्तापूर्ण बन सके और छात्रों के स्तर के अनुसार हो।साथ ही, छात्रों को भी इस ब्लूप्रिंट से परिचित कराया जाएगा,जिससे वे बोर्ड परीक्षा की तैयारी को सही दिशा में आगे बढ़ा सकें।
त्योहारी अवकाश के बाद तेज हुई पढ़ाई
दिवाली और दशहरा अवकाश के बाद स्कूलों में पढ़ाई अब तेजी पकड़ रही है।हालांकि, फिलहाल 10वीं और 12वीं की बोर्ड कक्षाओं की पढ़ाई पूरी नहीं हुई है।कई शिक्षक अन्य गतिविधियों में व्यस्त थे;कुछ को बीएलओ (BLO) की ड्यूटी दी गई थी,तो कुछ अन्य कार्यों में संलग्न थे।इस स्थिति में शिक्षकों पर कोर्स पूरा करने का दबाव बढ़ गया है।यदि पढ़ाई एक महीने में पूरी नहीं होती है,तो छात्रों के लिए प्री-बोर्ड परीक्षाओं में शामिल होना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
प्राचार्य का बयान: छात्रों के लिए लाभकारी होगा प्री-बोर्ड
सरकारी बालिका उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, साडा के प्राचार्य रंधीर सिंह ने कहा कि सरकार द्वारा जारी आदेश के बाद अब सभी सरकारी स्कूलों में प्री-बोर्ड परीक्षाएं आयोजित करनी अनिवार्य होंगी।अब तक सभी सरकारी स्कूलों में प्री-बोर्ड नहीं होते थे,लेकिन यह व्यवस्था अब लागू कर दी गई है।प्राचार्य ने बताया कि प्री-बोर्ड परीक्षाओं का आयोजन जनवरी के तीसरे सप्ताह में किया जाएगा और कोर्स को 10 जनवरी तक पूरा करना अनिवार्य कर दिया गया है।प्राचार्य ने यह भी कहा कि छात्रों के परीक्षा के भय को कम करने और उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने के उद्देश्य से दिसंबर 15 तक कोर्स पूरा करने के प्रयास किए जा रहे हैं।इससे प्री-बोर्ड परीक्षा के माध्यम से छात्रों को बोर्ड परीक्षा की तैयारी करने में आसानी होगी,जिससे वे परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे। इस नई व्यवस्था से परीक्षा परिणामों में निश्चित रूप से सुधार आएगाऔर छात्रों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।सरकारी स्कूलों में प्री-बोर्ड परीक्षाओं का आयोजन शिक्षा के स्तर को सुधारने और छात्रों को बोर्ड परीक्षाओं के लिए तैयार करने का महत्वपूर्ण कदम है। इस पहल से सरकारी और निजी स्कूलों के बीच का अंतर कम होगा और सरकारी स्कूलों के छात्रों को भी प्रतियोगी माहौल मिलेगा।
: प्रकाश उत्सव पर शहर में निकला भव्य नगर कीर्तन
Thu, Nov 14, 2024
प्रकाश उत्सव के पावन अवसर पर सिख धर्म के पहले गुरु, श्री गुरु नानक देव जी के सम्मान में बुधवार को शहर में भव्य नगर कीर्तन और शोभायात्रा का आयोजन हुआ। यह नगर कीर्तन गुरु ग्रंथ साहिब के नेतृत्व में पंज प्यारे और कीर्तन मंडली के साथ निकाला गया। इस शोभायात्रा की शुरुआत मकई चौक स्थित गुरुद्वारा से हुई, जो शहर के मुख्य मार्गों जैसे गोलबाजार, चमेली चौक, गांधी मैदान, शिव चौक, रत्नाबंधा से होते हुए नगर कीर्तन गुरुद्वारा में समाप्त हुई।
इस दौरान विभिन्न व्यापारिक और सामाजिक संगठनों ने नगर कीर्तन का स्वागत फूलों की वर्षा कर किया, और श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में मिठाई बांटी गई।श्री गुरु नानक देव जी का प्रकाश पर्व 15 नवंबर को बड़े उत्साह के साथ मनाया जाएगा।इस पर्व के पूर्व सिख समुदाय द्वारा नगर कीर्तन का आयोजन किया गयाजिसमें पंज प्यारे विशेष आकर्षण का केंद्र बने। पूरे नगर कीर्तन के दौरान श्रद्धालुओं में अद्वितीय उत्साह देखा गया।आतिशबाजी की चमक ने शोभायात्रा में विशेष रंग भरे।शोभायात्रा में युवा सबसे आगे चल रहे थे, उनके पीछे समुदाय के प्रमुख लोग थे।तीसरी पंक्ति में श्री गुरु नानक देव जी की भव्य तस्वीर एक सजी-धजी रथ पर रखी गई थी।शोभायात्रा में पंज प्यारे अपने विशेष निशान के साथ शामिल थे,जिनके प्रति आदर प्रकट करते हुए समुदाय की युवतियाँ और बच्चे रास्ते को साफ कर रहे थे।महिलाओं ने शोभायात्रा के अंतिम भाग में भक्ति भरे कीर्तन गाए।बैंड की धुन पर निकली यह शोभायात्रा सभी के लिए आकर्षण का केंद्र बनी रही।अन्य समुदायों और संस्थाओं ने विभिन्न स्थानों पर इस शोभायात्रा का स्वागत किया।इस अवसर पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम भी किए गए थे।प्रकाश पर्व की तिथि, कार्तिक पूर्णिमा, पर गुरु नानक देव जी का जन्मोत्सव बड़ी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है।श्री गुरु नानक देव जी को सिख धर्म के संस्थापक के रूप में सम्मानित किया जाता है।कार्तिक पूर्णिमा और प्रकाश पर्व के इस पावन अवसर पर गुरुद्वारों को विशेष रूप से सजाया जाता है,जहाँ गुरु वाणी का पाठ और विशाल लंगर का आयोजन किया जाता है।इस प्रकार, यह पर्व सिख समुदाय के लिए श्रद्धा, एकता और सेवा का प्रतीक है,और पूरे शहर में एक विशेष उत्सव का माहौल बनाता है।
: गांवों में महिला सशक्तिकरण की मिसाल बन रहीं ‘लखपति दीदी’
Wed, Nov 13, 2024
हर वर्ग और अवसर पर महिला सशक्तिकरण की बात होती है। कभी महिलाओं को देवी का रूप मानकर पूजा जाता है तो कभी उन्हें शक्ति के प्रतीक के रूप में सम्मानित किया जाता है। एक समय था जब पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं को केवल रसोई तक ही सीमित रखा गया था। धीरे-धीरे हालात बदले और अब महिलाएं घर से बाहर निकलकर अपने परिवार को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही हैं। खासकर छत्तीसगढ़ के गांवों में 'लखपति दीदी' योजना से महिलाओं का जीवन बदल रहा है, जिससे उनके आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ रहे हैं।
सशक्तिकरण की ओर बढ़ता कदम लखपति दीदी योजना
महिलाओं की आय बढ़ाने और उन्हें सशक्त बनाने के लिए लखपति दीदी योजना चलाई जा रही है,जिसका लाभ अब सरगुजा संभाग के विभिन्न जिलों की महिलाएं उठा रही हैं।सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सरगुजा क्षेत्र में आदिवासी महिलाएं तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं।लखपति दीदी और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) ने इन महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाए हैं।इस योजना से न सिर्फ आय में वृद्धि हो रही है, बल्कि जीवन स्तर में भी सुधार हुआ है।
आत्मनिर्भरता की ओर ग्रामीण महिलाओं का सफर
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिला समूहों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए प्रशिक्षण और ऋण उपलब्ध कराए जाते हैं। धीरे-धीरे महिलाएं रसोई से बाहर निकलकर आय अर्जित करने लगीं और जब उनके परिवारों पर कोई आर्थिक संकट आया, तो इन महिलाओं ने अपने परिवार का सहारा बनना सीखा। प्रधानमंत्री ने लखपति दीदी योजना की शुरुआत की, जिसमें महिलाओं को लखपति बनने का लक्ष्य दिया गया। इस योजना में महिलाओं को आत्मनिर्भरता के लिए प्रोत्साहित किया गया और उन्हें सालाना एक लाख रुपये की आय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रशिक्षित किया गया।
सफलता की कहानियाँ लखपति दीदी बनकर बदल रही हैं जिंदगी
सरगुजा जिले के घंघरी गांव की आदिवासी महिला सोनी पैकरा,जो पहले एक गृहिणी थीं,ने इस योजना के तहत ऋण लेकर खेती और बकरी पालन शुरू किया।आज वह न केवल लखपति दीदी बन चुकी हैं,बल्कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से समूह में काम करते हुए आरबीके (रूरल बिजनेस कोरेस्पॉन्डेंट) भी बन गई हैं,जिससे उनकी आय में भी वृद्धि हो रही है।रुखपुर गांव की कांता, जो पहले घर के कामों में ही व्यस्त रहती थीं,अब समूह से जुड़कर अन्य महिलाओं को ऋण देकर उनके जीवन को भी बदल रही हैं।बकरी पालन और सब्जी की खेती से उन्होंने अपनी आय बढ़ाई है,जिससे न केवल वह अपने परिवार की आर्थिक ज़िम्मेदारियाँ संभाल रही हैं,बल्कि अपने बच्चों की शिक्षा का भी प्रबंध कर पा रही हैं।रुखपुर की ही सुनीता पैकरा ने समूह में शामिल होकर ऋण लिया और सब्जियों की खेती शुरू की,जिससे अच्छी कमाई हुई। सुनीता के अनुसार गांव में शहरों की तुलना में जागरूकता कम है,लेकिन अब महिलाएं घर से बाहर आकर आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैंऔर परिवार की आर्थिक स्थिति सुधार रही हैं।
जिले का विकास महिला सशक्तिकरण में बढ़ते कदम
जिला मिशन प्रबंधक नीरज नामदेव ने बताया कि सरगुजा जिले में लखपति दीदी योजना के तहत महिलाएं तेजी से आत्मनिर्भर बन रही हैं।अब तक 40,411 महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं।जिले को आगामी तीन वित्तीय वर्षों में 46,250 महिलाओं को लखपति बनाने का लक्ष्य दिया गया है।पिछले वर्ष 36,057 महिलाओं को लखपति दीदी के रूप में चयनित किया गया थाऔर इस वर्ष अब तक 7,023 महिलाओं ने इस उपलब्धि को हासिल किया है।सरगुजा जिले में 1 लाख 13 हजार 530 महिलाएं महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से इस योजना का लाभ उठा रही हैंऔर अपने परिवार के लिए आजीविका अर्जित कर रही हैं।लखपति दीदी योजना ने छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के जीवन में नया उत्साह और आत्मविश्वास जगाया है।यह योजना महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का एक सफल उदाहरण बनकर उभरी है,जिससे न केवल उनकी आय में वृद्धि हो रही है बल्कि उन्हें समाज में एक नई पहचान भी मिल रही है।