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: गांवों में महिला सशक्तिकरण की मिसाल बन रहीं ‘लखपति दीदी’

admin Wed, Nov 13, 2024

हर वर्ग और अवसर पर महिला सशक्तिकरण की बात होती है। कभी महिलाओं को देवी का रूप मानकर पूजा जाता है तो कभी उन्हें शक्ति के प्रतीक के रूप में सम्मानित किया जाता है। एक समय था जब पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं को केवल रसोई तक ही सीमित रखा गया था। धीरे-धीरे हालात बदले और अब महिलाएं घर से बाहर निकलकर अपने परिवार को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही हैं। खासकर छत्तीसगढ़ के गांवों में 'लखपति दीदी' योजना से महिलाओं का जीवन बदल रहा है, जिससे उनके आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ रहे हैं।

सशक्तिकरण की ओर बढ़ता कदम लखपति दीदी योजना महिलाओं की आय बढ़ाने और उन्हें सशक्त बनाने के लिए लखपति दीदी योजना चलाई जा रही है, जिसका लाभ अब सरगुजा संभाग के विभिन्न जिलों की महिलाएं उठा रही हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सरगुजा क्षेत्र में आदिवासी महिलाएं तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं। लखपति दीदी और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) ने इन महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाए हैं। इस योजना से न सिर्फ आय में वृद्धि हो रही है, बल्कि जीवन स्तर में भी सुधार हुआ है।

आत्मनिर्भरता की ओर ग्रामीण महिलाओं का सफर

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिला समूहों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए प्रशिक्षण और ऋण उपलब्ध कराए जाते हैं। धीरे-धीरे महिलाएं रसोई से बाहर निकलकर आय अर्जित करने लगीं और जब उनके परिवारों पर कोई आर्थिक संकट आया, तो इन महिलाओं ने अपने परिवार का सहारा बनना सीखा। प्रधानमंत्री ने लखपति दीदी योजना की शुरुआत की, जिसमें महिलाओं को लखपति बनने का लक्ष्य दिया गया। इस योजना में महिलाओं को आत्मनिर्भरता के लिए प्रोत्साहित किया गया और उन्हें सालाना एक लाख रुपये की आय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रशिक्षित किया गया।

 सफलता की कहानियाँ लखपति दीदी बनकर बदल रही हैं जिंदगी सरगुजा जिले के घंघरी गांव की आदिवासी महिला सोनी पैकरा, जो पहले एक गृहिणी थीं, ने इस योजना के तहत ऋण लेकर खेती और बकरी पालन शुरू किया। आज वह न केवल लखपति दीदी बन चुकी हैं, बल्कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से समूह में काम करते हुए आरबीके (रूरल बिजनेस कोरेस्पॉन्डेंट) भी बन गई हैं, जिससे उनकी आय में भी वृद्धि हो रही है। रुखपुर गांव की कांता, जो पहले घर के कामों में ही व्यस्त रहती थीं, अब समूह से जुड़कर अन्य महिलाओं को ऋण देकर उनके जीवन को भी बदल रही हैं। बकरी पालन और सब्जी की खेती से उन्होंने अपनी आय बढ़ाई है, जिससे न केवल वह अपने परिवार की आर्थिक ज़िम्मेदारियाँ संभाल रही हैं, बल्कि अपने बच्चों की शिक्षा का भी प्रबंध कर पा रही हैं। रुखपुर की ही सुनीता पैकरा ने समूह में शामिल होकर ऋण लिया और सब्जियों की खेती शुरू की, जिससे अच्छी कमाई हुई। सुनीता के अनुसार गांव में शहरों की तुलना में जागरूकता कम है, लेकिन अब महिलाएं घर से बाहर आकर आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधार रही हैं।  जिले का विकास महिला सशक्तिकरण में बढ़ते कदम जिला मिशन प्रबंधक नीरज नामदेव ने बताया कि सरगुजा जिले में लखपति दीदी योजना के तहत महिलाएं तेजी से आत्मनिर्भर बन रही हैं। अब तक 40,411 महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। जिले को आगामी तीन वित्तीय वर्षों में 46,250 महिलाओं को लखपति बनाने का लक्ष्य दिया गया है। पिछले वर्ष 36,057 महिलाओं को लखपति दीदी के रूप में चयनित किया गया था और इस वर्ष अब तक 7,023 महिलाओं ने इस उपलब्धि को हासिल किया है। सरगुजा जिले में 1 लाख 13 हजार 530 महिलाएं महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से इस योजना का लाभ उठा रही हैं और अपने परिवार के लिए आजीविका अर्जित कर रही हैं। लखपति दीदी योजना ने छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के जीवन में नया उत्साह और आत्मविश्वास जगाया है। यह योजना महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का एक सफल उदाहरण बनकर उभरी है, जिससे न केवल उनकी आय में वृद्धि हो रही है बल्कि उन्हें समाज में एक नई पहचान भी मिल रही है।

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