: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) की आज
Wed, Jun 5, 2024
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) की आज
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) की आज से मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की मीटिंग शुरू हो रही है। इस महत्वपूर्ण मीटिंग में आरबीआई के बैठने से नए दिशानिर्देश तय होंगे, जो आर्थिक उदारीकरण और विकास के प्रति निरंतर समर्थन को बढ़ावा देगे।
इस मीटिंग में बदलाव के संकेत नहीं हैं, जैसा कि अनुसंधानकर्ताओं ने बताया है। वर्तमान में रेपो दर 6.50% है, जो बिना किसी परिवर्तन के अप्रैल की मीटिंग से आई थी।
पिछले वित्त वर्ष में रेपो दर में कई बदलाव हुए थे, जिससे आर्थिक स्थिति में सुधार किया गया था। आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी की मीटिंग नियमित अंतराल पर होती है और इसका पहला चरण अप्रैल 2022 में हुआ था, जब रेपो दर को 4% पर निर्धारित किया गया था। लेकिन तब 2 और 3 मई को अनायास होने वाली मीटिंग में इसे 0.40% बढ़ाकर 4.40% कर दिया गया था।
रेपो दर में परिवर्तन की यह सीरीज उस समय शुरू हुई थी, जब 22 मई 2020 को बिना किसी अद्यतन के यह बदलाव किया गया था। इसके बाद, 6 से 8 जून के बीच हुई मीटिंग में इसे 0.50% बढ़ाया गया, जिससे यह 4.40% से बढ़कर 4.90% हो गई। इसके बाद अगस्त में 0.50% का और बढ़ोतरी किया गया और यह 5.40% पर पहुंच गई।सितंबर में ब्याज दरें 5.90% हो गईं और फिर दिसंबर में 6.25% पर पहुंच गईं। इसके बाद, 2022-23 के वित्त वर्ष की आखिरी मीटिंग फरवरी में हुई, जिसमें रेपो दरें 6.25% से बढ़ाकर 6.50% कर दी गई थीं।
भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक रुझान:
रेपो दर के परिवर्तन का क्या महत्व है?
रिजर्व बैंक के पास रेपो दर के माध्यम से महंगाई को नियंत्रित करने का एक शक्तिशाली और प्रभावी तरीका है। जब महंगाई बढ़ती है, तो आरबीआई रेपो दर में वृद्धि करके मनी सप्लाई को नियंत्रित करने का प्रयास करता है, जिससे रुपये की मूल्य में स्थिरता बनी रहे। यदि रेपो दर उच्च होती है, तो बैंकों को ऋण लेने की दर बढ़ाने पर प्रेरित किया जाता है, जिससे उन्हें
आरबीआई
से ऋण प्राप्त करने पर अधिक ब्याज देना पड़ता है। यह उन्हें ऋण देने में आतंकित करता है और इस प्रक्रिया को स्थायीता प्रदान करता है।
सम्प्रेषिति के तौर पर, रेपो दर में कमी के लिए आरबीआई का निर्णय अर्थव्यवस्था को उत्तेजित करने का उपाय है। जब आर्थिक संकट की स्थिति होती है, तो आरबीआई रेपो दर को कम करके ऋण लेने के लिए अधिक सुलभता प्रदान करती है, जिससे उद्यमियों को आर्थिक गतिविधियों को पुनः प्रारंभ करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।
इस प्रकार, आरबीआई के निर्णय उत्तरदायित्वपूर्ण और सकारात्मक दिशा में अर्थव्यवस्था को प्रेरित करने का काम करते हैं, जो देश के अर्थतंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत होते हैं।
: 6% सेंसेक्स टूटा चुनाव नतीजों के रुझानों से
Tue, Jun 4, 2024
आज, यानी 4 जून को, लोकसभा चुनाव के नतीजों के साथ बाजार में एक अस्वीकृति देखी जा रही है। इस अस्वीकृति के परिणामस्वरूप, सेंसेक्स को करीब 4600 अंकों की गिरावट के साथ 72,000 से नीचे आया है। निफ्टी भी करीब 1400 अंकों की गिरावट के साथ 22,000 के स्तर पर कारोबार कर रही है।[caption id="attachment_3882" align="aligncenter" width="1024"]
6% सेंसेक्स टूटा चुनाव नतीजों के रुझानों से[/caption]यह गिरावट बाजार की सबसे बड़ी है, जो 4 मार्च 2020 के बाद देखी गई है। उस समय, कोरोना महामारी के कारण बाजार में 13.15% की टूट आई थी। बाजार के 30 शेयरों में से 24 में गिरावट देखी गई है, जबकि 6 शेयरों में तेजी की नजर है। SBI, NTPC, और पावर ग्रिड के शेयर 12% से अधिक नीचे गिरे हैं। लेकिन, हिंदुस्तान यूनिलीवर के शेयर में करीब 5% की तेजी देखी गई है।
भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक रुझान
इस गिरावट का असर न केवल शेयर बाजार में ही दिखा, बल्कि
NSE
के सभी सेक्टोरल इंडेक्स में भी। Nifty PSU बैंक इंडेक्स में 13% से अधिक गिरावट हुई है, जबकि ऑयल एंड गैस इंडेक्स में 10% की गिरावट नजर आई है। निफ्टी मेटल में 9% और रियल्टी में 4% से अधिक की गिरावट देखी गई है। ऑटो सेक्टर भी 3% से अधिक नीचे गिरा है।राजनीतिक दुनिया में हो रहे नतीजों के रुझानों के कारण, बाजारों में एक अस्थिरता का अनुभव हो रहा है। लोकसभा की 542 सीटों की काउंटिंग के दौरान, नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) और भारतीय नेशनल डेमोक्रेटिक इंडिपेंडेंट अलायंस (I.N.D.I.A.) के बीच टक्कर देखने को मिल रही है, जो बाजार को चुनौती देता है।