बार-बार थकान और जोड़ों में दर्द : हो सकता है Autoimmune Disease का संकेत, नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
अक्सर हम अपने शरीर के छोटे-छोटे संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं. थकान को तनाव समझ लेते हैं, पेट फूलने को खाने की गड़बड़ी मान लेते हैं और जोड़ों के दर्द को उम्र या काम का असर कहकर टाल देते हैं. लेकिन कई बार ये अलग-अलग समस्याएं नहीं होतीं, बल्कि एक बड़े कारण की ओर इशारा करती हैं कि इम्यून सिस्टम का असंतुलन, जिसकी शुरुआत गट से हो सकती है.
कैसे होते हैं इसके संकेत?
दरअसल, ऑटोइम्यून बीमारियां शुरुआत में जोर से नहीं, बल्कि धीरे-धीरे संकेत देती हैं. शरीर इनको लेकर शोर नहीं मचाता, बल्कि हल्के-हल्के संकेत देता है, जिन्हें अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है. कई मामलों में इसकी शुरुआत गट से होती है, जहां से इम्यून सिस्टम का बड़ा हिस्सा नियंत्रित होता है. गट सिर्फ पाचन का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह शरीर का एक बड़ा इम्यून सेंटर भी है. लगभग 70 प्रतिशत इम्यून गतिविधियां गट की परत में होती हैं. यहां मौजूद माइक्रोबायोम यानि बैक्टीरिया, वायरस और फंगस का एक संतुलित समूह इम्यून सिस्टम को सही तरीके से काम करने में मदद करता है. लेकिन जब यह संतुलन बिगड़ता है, तो शरीर की इम्यून सिस्टम खुद ही भ्रमित होने लगती है.
जब गट की परत कमजोर हो जाती है, जिसे आमतौर पर लीकी गट कहा जाता है, तो हानिकारक तत्व खून में पहुंच सकते हैं. इससे इम्यून सिस्टम बार-बार सक्रिय होता है और सूजन बढ़ने लगती है. समय के साथ यही स्थिति ऑटोइम्यून समस्याओं का कारण बन सकती है.
शुरुआती लक्षण क्या होते हैं?
इसके शुरुआती लक्षण बहुत सामान्य लगते हैं, जैसे लगातार थकान, बार-बार पेट फूलना, दिमाग में धुंधलापन, हल्का लेकिन बार-बार होने वाला जोड़ों का दर्द या त्वचा से जुड़ी समस्याएं. ये संकेत अकेले देखने पर गंभीर नहीं लगते, लेकिन अगर ये लंबे समय तक बने रहें या एक साथ दिखें, तो इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. इम्यून सिस्टम में गड़बड़ी का एक कारण मॉलिक्यूलर मिमिक्री भी हो सकता है. इसमें कुछ बैक्टीरिया शरीर के अपने टिश्यू जैसे दिखते हैं, जिससे इम्यून सिस्टम भ्रमित होकर शरीर के ही हिस्सों पर हमला करने लगता है. यही प्रक्रिया धीरे-धीरे ऑटोइम्यून बीमारियों को जन्म देती है.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
डॉक्टरों ने बताया कि ऑटोइम्यून बीमारियां हमेशा वहीं से शुरू नहीं होतीं जहां लक्षण दिखते हैं. कई मामलों में इसकी शुरुआत गट से जुड़े इम्यून असंतुलन से हो सकती हैं. वे बताते हैं कि शुरुआती संकेत बहुत हल्के होते हैं, इसलिए लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे जांच में देरी हो जाती है. डॉक्टरों का मानना है कि अगर थकान, पेट की समस्या और सूजन जैसे लक्षण एक साथ और लंबे समय तक बने रहें, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. समय रहते पहचान हो जाए, तो इन बीमारियों को बेहतर तरीके से कंट्रोल किया जा सकता है.
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