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: पटना में अस्पताल में शव से गायब हुई आंख, परिजनों ने अस्पताल पर लगाया आरोप, डॉक्टर ने कहा: चूहे खाते हैं

admin Mon, Nov 18, 2024

पटना में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक व्यक्ति के शव से उसकी बायीं आंख गायब हो गई। यह मामला तब सामने आया जब परिवार के सदस्य अपने रिश्तेदार की मौत के बाद अस्पताल में शव के साथ थे। परिवार के अनुसार, अस्पताल के कर्मचारियों ने आंख निकाल ली, जबकि डॉक्टरों का दावा है कि यह चूहे द्वारा खाई गई हो सकती है।

घटना का विवरण पटना के नालंदा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (NMCH) में यह घटना गुरुवार को हुई। फंटूस कुमार नामक व्यक्ति को पेट में गोली लगने के बाद अस्पताल लाया गया था। इलाज के दौरान उनकी स्थिति बिगड़ गई और अगले दिन शुक्रवार रात को उनकी मौत हो गई। उनका इलाज ICU में किया जा रहा था। अस्पताल में भर्ती के दौरान, फंटूस के परिवारवाले उनके पास थे, लेकिन रात के करीब 1 बजे वे घर लौट गए। जब वे कुछ घंटे बाद वापस लौटे, तो उनका शव बिस्तर पर पड़ा हुआ था, लेकिन उनकी बायीं आंख गायब थी। परिजनों का आरोप परिवार के सदस्य अस्पताल पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। फंटूस के साले ने NDTV से बातचीत में कहा, "यह कैसे हो सकता है कि अस्पताल इतनी लापरवाही दिखाए? या तो अस्पताल में कोई साजिश रची गई है, या फिर अस्पताल में लोगों की आंखें निकालने का कोई धंधा चल रहा है।" अस्पताल का बयान नालंदा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के मेडिकल सुप्रीटेंडेंट डॉ. विनोद कुमार सिंह ने घटना को बेहद चौंकाने वाला बताते हुए कहा कि इस मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि यह संभव है कि चूहे ने आंख को खा लिया हो। डॉ. सिंह ने NDTV से कहा, "फंटूस कुमार को गोली लगने के बाद ICU में भर्ती किया गया था, जहां ऑपरेशन कर गोली निकाली गई थी, लेकिन वह रात 8:55 बजे मर गए। उनके परिवारवाले रात 1 बजे तक उनके साथ थे और सुबह 5 बजे हमें सूचित किया कि उनकी बायीं आंख गायब है। हम यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि यह कैसे हुआ। इस मामले में FIR दर्ज कर ली गई है।" पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से होगा स्पष्ट डॉ. सिंह ने घटना को "अस्वीकार्य" बताते हुए कहा कि पोस्टमॉर्टम के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आंख के गायब होने के पीछे क्या कारण था। उन्होंने कहा, "चूहे की संभावना को नकारा नहीं जा सकता है। हम पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार करेंगे। यह अस्वीकार्य है, और अगर किसी की लापरवाही पाई जाती है, तो उसे सजा दी जाएगी।" उन्होंने अस्पताल द्वारा आंख निकालने के आरोपों पर कहा, "अगर किसी ने आंख निकाली भी, तो यह किसी संभावित कोर्नियल ट्रांसप्लांट के लिए नहीं था, क्योंकि आंख निकालने का कोई लाभ नहीं होता। आंख केवल मौत के चार से छह घंटे के भीतर निकाली जाती है, तब ही वह ट्रांसप्लांट के लिए उपयोगी हो सकती है।" पुलिस की जांच

इस मामले में पुलिस भी सक्रिय हो गई है और अस्पताल के आस-पास के CCTV फुटेज की जांच की जा रही है ताकि घटना के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त की जा सके।

यह घटना एक गंभीर सवाल खड़ा करती है कि अस्पतालों में इस प्रकार की लापरवाही कैसे हो सकती है। हालांकि डॉक्टरों ने चूहे के कारण का हवाला दिया है, लेकिन परिजनों का आरोप है कि इस मामले में कोई साजिश हो सकती है। अब इस मामले की जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही सही तथ्य सामने आएंगे। यह घटना स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की आवश्यकता को फिर से उजागर करती है, ताकि ऐसी घटनाएं भविष्य में न घटित हों और मरीजों और उनके परिवारों को उचित देखभाल मिल सके।

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