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Stroke Risk Factors : सावधान! स्ट्रोक आने से हफ्तों पहले शरीर देता है ये 5 वॉर्निंग सिग्नल, न करें नजरअंदाज

Media Yodha Desk Thu, Mar 26, 2026

Stroke Risk Factors: स्ट्रोक तब होता है, जब ब्रेन तक ऑक्सीजन और खून की सप्लाई अचानक कम या बंद हो जाती है. अगर समय पर इलाज न मिले, तो कुछ ही मिनटों में जान जा सकती है या व्यक्ति हमेशा के लिए लकवे का शिकार हो सकता है. यही वजह है कि स्ट्रोक को मेडिकल इमरजेंसी माना जाता है. हालांकि कई बार स्ट्रोक अचानक आता है, लेकिन ज्यादातर मामलों में शरीर पहले ही कुछ चेतावनी संकेत देने लगता है, जो स्ट्रोक से हफ्तों या महीनों पहले दिख सकते हैं. caneandable की रिपोर्ट के अनुसार, इन शुरुआती संकेतों को समय रहते पहचान लिया जाए, तो स्ट्रोक को रोका जा सकता है या उसके गंभीर असर से बचाव संभव है, इन लक्षणों में-

असामान्य और लगातार सिरदर्द

स्ट्रोक से पहले होने वाला सिरदर्द आम सिरदर्द से अलग होता है. यह बिना किसी कारण अचानक शुरू हो सकता है, ज्यादा तेज होता है और लंबे समय तक बना रहता है. कई बार दर्द की दवाओं से भी आराम नहीं मिलता. इसके साथ चक्कर आना, मतली या नजर धुंधली होना जैसे लक्षण भी दिख सकते हैं. यह दिमाग में दबाव या ब्लीडिंग के शुरुआती संकेत हो सकते हैं. अगर सिरदर्द पहले से अलग महसूस हो और लगातार बना रहे, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना जरूरी है.

 शरीर के एक हिस्से में कमजोरी या सुन्नपन

चेहरे, हाथ या पैर में अचानक कमजोरी या सुन्नपन महसूस होना, खासकर शरीर के एक ही तरफ, स्ट्रोक का अहम चेतावनी संकेत है. कई बार यह कमजोरी हल्की होती है और कुछ देर बाद ठीक भी हो जाती है, जिससे लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन ऐसा बार-बार होना खतरनाक हो सकता है. यह संकेत देता है कि दिमाग के उस हिस्से में खून की सप्लाई कम हो रही है.

बोलने और समझने में दिक्कत

स्ट्रोक से पहले बोलने में लड़खड़ाहट, सही शब्द न मिल पाना या सामने वाले की बात समझने में परेशानी हो सकती है. कभी-कभी व्यक्ति खुद महसूस करता है कि वह ठीक से बोल नहीं पा रहा. यह दिमाग के उस हिस्से पर असर का संकेत है, जो भाषा और समझ को नियंत्रित करता है. यह लक्षण अचानक आता है और इसे कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए.

 नजर से जुड़ी अचानक समस्याएं

PMC की रिपोर्ट के अनुसार, अचानक धुंधला दिखना, डबल दिखना, आंखों के सामने चमकती रोशनी दिखना या एक आंख से कम दिखना भी स्ट्रोक का संकेत हो सकता है. कई बार देखने का दायरा ही कम हो जाता है. ऐसे लक्षण ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक यानी मिनी स्ट्रोक से जुड़े हो सकते हैं, जो आगे चलकर बड़े स्ट्रोक में बदल सकता है.

चक्कर, संतुलन बिगड़ना और चलने में परेशानी

अगर बिना किसी वजह चक्कर आए, चलने में लड़खड़ाहट हो या शरीर का संतुलन बार-बार बिगड़े, तो यह भी चेतावनी संकेत हो सकता है. ब्रेन के संतुलन और कोऑर्डिनेशन से जुड़े हिस्सों में खून की कमी होने पर ऐसे लक्षण दिखते हैं.

कैसे कर सकते हैं बचाव?

ज्यादातर मामलों में स्ट्रोक से बचाव सही लाइफस्टाइल और नियमित स्वास्थ्य देखभाल से संभव है. डॉक्टरों के अनुसार, ब्लड प्रेशर को नियंत्रण में रखना स्ट्रोक से बचाव का सबसे अहम तरीका है। इसके लिए नियमित हेल्थ चेकअप कराना और डॉक्टर द्वारा दी गई दवाएं समय पर लेना जरूरी होता है. नियंत्रित ब्लड प्रेशर दिल और दिमाग दोनों को सुरक्षित रखने में मदद करता है. नियमित एक्सरसाइज भी बेहद जरूरी है. रोज कम से कम 30 मिनट की शारीरिक गतिविधि, जैसे तेज चलना, योग या हल्का वर्कआउट, ब्लड फ्लो बेहतर करता है और ब्लड वेसल्स को स्वस्थ रखता है. इसके साथ ही धूम्रपान छोड़ना और शराब का सेवन सीमित करना स्ट्रोक के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकता है.

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