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Smoking kills : सिगरेट और गांजा पीने वालों का सिकुड़ रहा दिमाग, नई स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा

Media Yodha Desk Sat, Apr 11, 2026

Smoking kills: आज के समय में ड्रग यूज जैसे गांजा (वीड) और तम्बाकू, Gen-Z और Millenials के बीच काफी आम हो गए हैं. ये सोसाइटी में इस तरह normalize कर दिए गए हैं कि ये अब कल्चर का हिस्सा बनते जा रहे हैं. इसमें यह जानना बहुत जरूरी हो जाता है कि ये न्यूरोएक्टिव ड्रग्स हमारे दिमाग पर क्या असर डालते हैं और लंबे समय तक इसका इस्तेमाल करने से क्या दिक्कतें आती हैं. हाल ही में Addiction द्वारा पब्लिश की गई रिसर्च में चौंकाने वाला सच सामने आया है, जिसमें स्मोकिंग की वजह से दिमाग में सिकुड़न जैसी गंभीर समस्याएं देखी गई हैं, जो आज के युवाओं ही नहीं बल्कि हर पीढ़ी के लिए खतरे की घंटी है.

गांजा और तम्बाकू उपयोग के पैटर्न

गांजा का कंजम्पशन दिन प्रतिदिन बढता जा रहा है. 2022 के डेटा के अनुसार लगभग 23 करोड लोग इसका सालाना सेवन कर रहे थे, जो दुनिया की कुल आबादी का 4.4 प्रतिशत था.
तंबाकू का इस्तेमाल इससे भी कहीं ज्यादा होता है. 2020 की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया की लगभग 30 प्रतिशत आबादी इसका सेवन करती है, और यह हर साल करीब 80 लाख मौतों का कारण बनता है. इसके अधिक सेवन से गरीब वर्ग के लोग ज्यादा प्रभावित होते हैं.

रिसर्च में क्या खुलासे हुए?

इस स्टडी में (Cross sectional, Longitudinal, MR) जैसे तरीकों को देखकर यह पाया गया कि गांजा और सिगरेट के दिमाग पर असर को लेकर रिसर्च अभी सीमित है. कई स्टडीज में डेटा संतुलित नहीं था. जैसे गांजे के लिए पुरुषों के सैंपल ज्यादा थे, जबकि तंबाकू में महिलाओं के सैंपल ज्यादा थे. फिर भी, जितना डेटा उपलब्ध है, उसके आधार पर कुछ चिंताजनक नतीजे सामने आए हैं:

  • कुछ मामलों में गांजा से दिमाग के एक हिस्से (अमिगडाला) का साइज छोटा पाया गया, लेकिन हर उम्र में ऐसा असर नहीं दिखा.

  • तम्बाकू यूजर्स में दिमाग के कई हिस्सों का साइज छोटा दिखा, खासकर ग्रे मैटर.

  • तम्बाकू से सूजन और नुकसान बढ़ सकता है, जबकि गांजा में मौजूद सीबीडी थोड़ा बचाव कर सकता है.

  • दोनों को साथ लेने पर अभी बहुत कम रिसर्च है और कोई साफ नतीजा नहीं मिला है.

रिसर्च का निष्कर्ष

यह पहली ऐसी स्टडी है जिसमें गांजा और तम्बाकू के असर को दिमाग के साइज से जोड़ा गया है. इसमें पाया गया कि तम्बाकू यूज से दिमाग के उन हिस्सों में कमी देखी गई जो मेमोरी और इमोशन से जुड़े होते हैं, जबकि गांजा के लिए सबूत उतने साफ नहीं थे.
तम्बाकू के नतीजे ज्यादा भरोसेमंद रहे, लेकिन कुछ और कारण भी हो सकते हैं. यह रिसर्च बताती है कि दोनों के साथ इस्तेमाल पर और रिसर्च की जरूरत है और इनके नुकसान को लेकर जागरूकता जरूरी है.

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