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रांची : झारखंड में वज्रपात से अब तक 2717 मौतें: जानिए क्यों झारखंड वज्रपात का हॉटस्पॉट है और इससे कैसे बचा जा सकता है

admin Sat, May 24, 2025

झारखंड एक प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर राज्य है, लेकिन यही राज्य अब एक गंभीर प्राकृतिक आपदा वज्रपात (आकाशीय बिजली) का केंद्र बन चुका है। हर साल सैकड़ों लोग वज्रपात की चपेट में आकर अपनी जान गंवा देते हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 10 सालों (2014-15 से 2023-24) में झारखंड में वज्रपात से 2717 लोगों की मौत हो चुकी है।

मई 2025 में ही दर्ज हुईं कई दर्दनाक घटनाएं:

  • 19 मई 2025 – झारखंड में वज्रपात से 5 लोगों की मौत, 6 घायल।

  • 20 मई 2025 – बोकारो में वज्रपात से 3 लोगों की मौत

  • 21 मई 2025 – लातेहार में वज्रपात से 28 पशुओं की मौत

  • गढ़वा जिले में एक मैट्रिक छात्र समेत 3 की मौत

  • 16 मई 2025 – CRPF अधिकारी और झारखंड पुलिस के 2 ASI सहित कई लोग वज्रपात की चपेट में आए, 1 की मौत।

  • 1 मई 2025 – लोहरदगा और लातेहार में 2 मौतें

क्यों झारखंड है वज्रपात का हॉटस्पॉट?

मौसम विज्ञान केंद्र, रांची के निदेशक अभिषेक आनंद के मुताबिक, झारखंड की भौगोलिक संरचना वज्रपात के लिए जिम्मेदार है:

  • पठारी इलाका और समुद्र तल से ऊंचाई।

  • जमीन के अंदर खनिज संपदा की भरमार।

  • राज्य में फैले घने जंगल, तालाब, जलाशय।

  • मानसून के दौरान भारी नमी और तापमान का अंतर

ये सभी कारक झारखंड को वज्रपात के लिहाज से सबसे संवेदनशील राज्य बनाते हैं।

ग्रामीण इलाकों पर सबसे ज्यादा खतरा:

झारखंड में वज्रपात से 90% से ज्यादा मौतें ग्रामीण क्षेत्रों में होती हैं, खासतौर पर किसान और खेतों में काम करने वाले मजदूर सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। खुले मैदान, खेतों में काम और पेड़ों के नीचे शरण लेना अक्सर जानलेवा साबित होता है।

कैसे बचें वज्रपात से?

मौसम विशेषज्ञ अभिषेक आनंद ने बताया:
घने बादलों के दिखने पर खुले में न निकलें
✅ खेतों या खुले मैदानों में काम बंद कर सुरक्षित जगह पर शरण लें।
घने पेड़ों के नीचे खड़े न हों – ये आसमानी बिजली को आकर्षित करते हैं।
पक्के मकान या सुरक्षित आश्रय में रहें।
✅ बारिश के दौरान मोबाइल फोन, बिजली से जुड़े उपकरणों का उपयोग न करें।
✅ खेत में काम कर रहे किसानों को समय रहते अलर्ट सिस्टम के जरिए सतर्क करना जरूरी।

कब होता है सबसे ज्यादा खतरा?

झारखंड में जून-जुलाई के महीनों में सबसे ज्यादा वज्रपात की घटनाएं होती हैं। यही समय होता है जब किसान अपने खेतों में ज्यादा समय बिताते हैं और पशुपालक मवेशियों को चराने के लिए बाहर ले जाते हैं।

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