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Anxiety Symptoms : सांसें तेज होना और दिल की धड़कन बढ़ना कहीं एंग्जाइटी तो नहीं हो रही, जान लें Anxiety के लक्षण क्या-क्या होते हैं?

Media Yodha Desk Sun, May 17, 2026

Anxiety Symptoms: क्या अचानक आपकी सांसें तेज हो जाती हैं, दिल की धड़कन बढ़ जाती है, कंधे जकड़े हुए महसूस होते हैं और सिरदर्द होने लगता है। ये कोई वायरल इंफेक्शन नहीं बल्कि एंग्जाइटी है। एंग्जाइटी को हिंदी में चिंता कहते हैं और चिंका चिता के समान होती है। अगर किसी को चिंता लग जाए तो बिना बीमारी के भी शरीर पनप नहीं पाता। आजकल लोगों में चिंता की ये बीमारी महामारी की तरह फैल रही है। लोगों ने जिंदगी में न जाने कितने मापदंड बना लिए हैं जो पूरा न हों तो चिंता बढ़ जाती है। कई बार चिंता बाहरी और कई बार अंदरूनी हो सकती है। आइये जानते हैं एंग्जाइटी के लक्षण क्या हैं?

चिंता केवल मन की एक अवस्था है, जिसे मन महसूस करता है और मन ही उसका सामना करता है और उसके बारे में सोचता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो एंग्जाइटी एक ऐसी स्थिति है जिसमें हम किसी खतरे को महसूस करते हैं। यह बाहरी खतरा हो सकता है, जहां शरीर या मन को किसी बाहरी कारण से नुकसान पहुंच सकता है। यह आंतरिक खतरा भी हो सकता है, जहां हमारी अपनी क्षमताओं या अक्षमताओं को लेकर परेशान रहते हैं। कुल मिलाकर, व्यक्ति, मन और शरीर गंभीर रूप से चुनौती का सामना करते हैं। इससे शरीर बहुत ज्यादा अलर्ट मोड में चला जाता है। एंग्जाइटी होने पर एड्रेनालाईन और कोर्टिसोल जैसे तनाव से जुड़े हार्मोन निकलते हैं जिसकी वजह से ये लक्षण महसूस होते हैं।

एंग्जाइटी के लक्षण

हार्ट और सीने में जकड़न- मन और दिमाग में चिंता बढ़ने से शरीर बाहरी रूप से कोई संकेत दे उससे पहले ही दिल और छाती में लक्षण दिखाई देते हैं। तेज नाड़ी और छाती में जकड़न एंग्जाइटी के सबसे प्रमुख लक्षण हैं।

सांस तेज होना या कम आना- एंग्जाइटी होने पर सांस बढ़ने लगती है। कई बार सांस लेने में तकलीफ या घुटन सी भी महसूस होती है। ऐसी स्थिति में चक्कर आना और थकान होने की भी संभावना रहती है।

पेट खराब होना- जब आप बहुत ज्यादा एंग्जाइटी फील करते हैं तो इससे आपकी गट हेल्थ पर भी असर पड़ता है। इससे आंत संवेदनशील हो जाती हैं। जब आप तनाव या चिंता में रहते हैं तो शरीर को लड़ने और भागने दोनों स्थितियों के लिए तैयार करने के लिए शरीर की ज्यादातर खून मांसपेशियों की ओर प्रवाहित हो जाता है। जिससे आंतों की कार्यप्रणाली धीमी हो जाती है। ऐसे में मतली, पेट फूलना और कई बार शौचालय जाने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

मांसपेशियों का गुच्छा बनना- चिंता और डर की वजह से शरीर को सुरक्षित रखने के लिए मसल्स का एक गुच्छा बन जाता है जो खतरे के लिए तैयार रहती हैं। संभावना को देखते हुए मांसपेशियां सिकुड़ जाती हैं और अत्यधिक सतर्क हो जाती हैं। इससे गर्दन में दर्द और पीठ में अकड़न हो सकती है।

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