4th August 2026

BREAKING NEWS

राजा-सोनम की शादी का खाना बना विवाद की वजह, बकाया बिल पर कैटरर ने भेजा कानूनी नोटिस

जाम की सूचना मिलते ही 10 मिनट में पहुंचेगी पुलिस, QRT टीमें तैनात

अगस्त में बैंक और रेलवे समेत कई विभागों में निकलीं बंपर भर्तियां, जानें कैसे करें आवेदन!

बार-बार डॉक्यूमेंट जमा करने के झंझट से मिलेगी हमेशा के लिए मुक्ति, जानिए कैसे करेगा काम

वरना दिनभर सताएगी चक्कर और कमजोरी की समस्या!

Advertisment

Reflect Orbital space mirror : अब रात में भी नहीं होगा अंधेरा! अंतरिक्ष में 60 फीट का विशाल शीशा लगाने की तैयारी, अमेरिका के प्लान ने वैज्ञानिकों को कि

Reflect Orbital space mirror: स्पेस टेक्नोलॉजी की दुनिया से एक ऐसी हैरान कर देने वाली खबर आ रही है, जिसने पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों को भी चिंता में डाल दिया है. अमेरिका ने एक ऐसे प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है, जो सीधे तौर पर दिन और रात के चक्र को बदलने की ताकत रखता है. अंतरिक्ष में एक बड़ा शीशा फिट करने की तैयारी है, जो रात के घने अंधेरे में भी धरती के एक बड़े हिस्से पर भी सूरज की रोशनी भर देगा. इस फैसले के बाद से ही एक बहुत बड़ा सवाल खड़ा हो गया है क्या इंसानी फायदे के लिए प्रकृति से की जा रही यह छेड़छाड़ दुनिया के लिए खतरनाक साबित होगी? अमेरिका ने एक बेहद अनोखे और हैरान कर देने वाले स्पेस प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है. अब अंतरिक्ष में एक ऐसा सैटेलाइट भेजा जाएगा, जो रात के अंधेरे में धरती पर सूरज की रोशनी रिफ्लेक्ट करेगा. अमेरिकी रेगुलेटर फेडरल कम्युनिकेशंस कमिशन यानी FCC ने कैलिफोर्निया के एक स्टार्टअप रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल को अपने पहले टेस्ट सैटेलाइट, इरेंडिल-1 को लो अर्थ ऑर्बिट में लॉन्च करने की हरी झंडी दे दी है. कंपनी का दावा है कि इस तकनीक से रात के समय भी सोलर फार्म्स के लिए दिन जैसा उजाला किया जा सकेगा.

क्या है कंपनी का पूरा प्लान?

60 फीट का विशाल शीशा
रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल का यह प्रोटोटाइप सैटेलाइट साइज में एक छोटा फ्रिज जैसा होगा. लेकिन अंतरिक्ष में लगभग 400 मील यानी 640 किलोमीटर की ऊंचाई पर पहुंचने के बाद, यह 60 फीट चौड़ा एक चौकोर शीशा खोलेगा.

5 किमी के दायरे में उजाला
यह शीशा सूरज की रोशनी को मोड़कर धरती के किसी खास 5 किलोमीटर के दायरे में प्रोजेक्ट करेगा.

फायदे क्या होंगे?

कंपनी के अनुसार, इससे सूर्यास्त के बाद भी सोलर पैनल से बिजली बनाई जा सकेगी. इसके साथ ही, आपदा के समय रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने और रात में कंस्ट्रक्शन या सड़कों पर रोशनी करने में मदद मिलेगी.

भविष्य का ये है प्लान

कंपनी की नजरें बहुत बड़ी हैं. उनका लक्ष्य 2028 तक ऐसे 1,000 और 2035 तक करीब 50,000 सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजने का है. ये भविष्य के शीशे करीब 180 फीट चौड़े होंगे और 100 पूर्णिमा के चांद जितनी रोशनी देंगे.

वैज्ञानिक क्यों जता रहे हैं भारी चिंता?

इस प्रोजेक्ट को लेकर वैज्ञानिक समुदाय में काफी गुस्सा और चिंता है. अमेरिकन एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी ने FCC को पत्र लिखकर कहा है कि यह प्रोजेक्ट पब्लिक इंटरेस्ट में नहीं है. वैज्ञानिकों का मानना है कि स्पेस में इतने चमकदार शीशों की वजह से बेहद संवेदनशील टेलिस्कोप्स के काम में बाधा आएगी और अंतरिक्ष के धुंधले ग्रहों या तारों को देखना नामुमकिन हो जाएगा.

विज्ञापन

जरूरी खबरें

विज्ञापन