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टीबी का खतरा किन लोगों को सबसे ज्यादा? : नेशनल हेल्थ मिशन ने दी नियमित जांच की सलाह

Media Yodha Desk Tue, Jun 9, 2026

तपेदिक (टीबी) आज भी देश की प्रमुख संक्रामक बीमारियों में से एक है. यह बीमारी मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है और समय पर पहचान और इलाज न होने पर गंभीर समस्या बन सकता है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ लोगों में सामान्य लोगों की तुलना में टीबी होने का खतरा अधिक होता है. ऐसे लोगों को विशेष सावधानी बरतने के साथ-साथ समय-समय पर जांच कराते रहना चाहिए. नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) के अनुसार, कुछ खास वर्गों के लोगों में टीबी संक्रमण का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में कहीं ज्यादा होता है. ऐसे में इन लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए और समय-समय पर स्क्रीनिंग करानी चाहिए ताकि बीमारी शुरुआती चरण में ही पकड़ी जा सके. टीबी पूरी तरह ठीक होने वाली बीमारी है, लेकिन शुरुआती पहचान बहुत जरूरी है.

टीबी मरीज के संपर्क में रहने वाले व्यक्ति को खतरा: अगर घर या आसपास कोई टीबी का मरीज है तो संक्रमण का खतरा बहुत बढ़ जाता है.

कुपोषण से जूझ रहे लोग: कमजोर इम्युनिटी और शरीर में पोषक तत्वों की कमी के कारण इनमें टीबी आसानी से फैल सकती है.

पिछले 5 साल में टीबी से ठीक हुए मरीज: पुरानी बीमारी दोबारा लौट सकती है.

एचआईवी से पीड़ित व्यक्ति: कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता के कारण टीबी इनके लिए घातक साबित हो सकती है.

डायबिटीज के मरीज: ब्लड शुगर कंट्रोल न होने पर टीबी का खतरा बढ़ जाता है.

60 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति: उम्र बढ़ने के साथ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है. ऐसे में बढ़ती उम्र में ये खतरा बढ़ जाता है.

लंबे समय से धूम्रपान या शराब का सेवन करने वाले: सिगरेट या बीड़ी का सेवन फेफड़ों को कमजोर बनाता है. वहीं, लंबे समय से शराब का सेवन करने वाले लोगों के लीवर और इम्युनिटी दोनों को नुकसान पहुंचती है.

भीड़भाड़ वाले स्थानों या स्लम एरिया में रहने वाले: जेल, अनाथालय, वृद्धाश्रम आदि जगहों पर रहने वाले लोगों के साथ ही स्लम एरिया में निवास करने वाले लोगों को खराब स्वच्छता और रहन-सहन की स्थिति के कारण खतरा अधिक होता है.

नेशनल हेल्थ मिशन का कहना है कि ऊपर बताए गए वर्गों को टीबी संक्रमण का खतरा ज्यादा होने के कारण उन्हें सतर्क रहना चाहिए. खांसी, बुखार, वजन घटना, रात में पसीना आना और थकान जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.

वहीं, बचाव के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं, अच्छा और पौष्टिक भोजन लें, धूम्रपान और शराब से दूर रहें. टीबी मरीज के संपर्क में आने पर डॉक्टर की सलाह से दवा शुरू करें और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें.

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