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Medicine Price Control : महंगी दवा बेचने वालों पर सख्ती! तय कीमत से ज्यादा वसूली पर होगा कड़ा एक्शन, केंद्र ने बदले नियम

Media Yodha Desk Sat, Jul 4, 2026

Medicine Price Control: आने वाले दिनों में मरीजों को सस्ती दवाओं का लाभ मिलेगा. इसके लिए केंद्र सरकार ने ड्रग्स (प्राइस कंट्रोल) ऑर्डर (DPCO), 2013 में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं. अधिसूचना के अनुसार, अब एक ही दवा के अलग-अलग पैक की अलग कीमत तय की जा सकेगी. इसके मुताबिक सरकार अब जरूरत पड़ने पर एक ही दवा के अलग-अलग पैक साइज, पैकेजिंग, डोज या दवा के स्वरूप (जैसे तरल या गैस) के आधार पर अलग-अलग अधिकतम या खुदरा कीमत तय कर सकेगी. इससे अलग पैक में आने वाली दवाओं की कीमत तय करना आसान होगा.

नई दवा लॉन्च करने की प्रक्रिया आसान

रसायन और उर्वरक मंत्रालय के औषधि विभाग की तरफ से जारी नोटिफिकेशन में कहा गया है कि अब अगर किसी नई दवा की खुदरा कीमत पहले ही तय हो चुकी है, तो अगले 12 महीनों के भीतर वही दवा लॉन्च करने वाली दूसरी कंपनी को दोबारा कीमत तय कराने के लिए आवेदन नहीं करना होगा. उसे दवा लॉन्च करने के एक महीने के भीतर सरकार को सिर्फ इसकी सूचना देनी होगी

कीमत घटने की जानकारी लोगों तक जल्दी पहुंचेगी

नियमों में बदलाव के तहत अब दवा कीमतों की निगरानी को लेकर सख्ती की गई है. संशोधन के अनुसार, अब दवा की कीमत कम होने पर कंपनियों को दो सप्ताह के भीतर डीलरों और मेडिकल स्टोर को नई मूल्य सूची भेजनी होगी. इसके अलावा कम से कम दो राष्ट्रीय अखबारों में विज्ञापन देकर नई कीमत की जानकारी देगी होगी. साथ ही कंपनी की वेबसाइट पर भी नई कीमत की जानकारी डालनी होगी और संशोधित मूल्य सूची राज्य औषधि नियंत्रकों और सरकार को भेजनी होगी.

तय कीमत से ज्यादा वसूली पर होगी कार्रवाई

मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अगर किसी कंपनी ने सरकार द्वारा तय कीमत से अधिक दाम पर दवा बेचती पाई गई, तो उसे ज्यादा वसूली गई रकम ब्याज सहित जमा करनी होगी. इसके अलावा उस पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है. सरकार ने नई दवा लॉन्च करने वाली कंपनियों के लिए नई सूचना फॉर्म (Form-IA) नाम का नया फॉर्म जोड़ा है. इसमें दवा का नाम, लॉन्च की तारीख, पैक साइज, उपयोग और लॉन्च कीमत जैसी सभी सूचना देनी होगी.

7 साल तक रखना होगा रिकॉर्ड

आदेश के तहत अब हर दवा निर्माता को बिक्री, उत्पादन और अन्य जरूरी रिकॉर्ड कम से कम 7 वित्तीय वर्षों तक सुरक्षित रखने होंगे.ताकि अगर सरकार को जरूरत पड़े तो वो इन रिकॉर्ड की जांच कर सके. अधिकारियों के अनुसार, इन संशोधन का मकसद दवाओं की कीमतों को लेकर पारदर्शिता बढ़ाना, मरीजों को तय कीमत पर दवाएं उपलब्ध कराना और नियमों का बेहतर पालन सुनिश्चित करना है.

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