पुंछ : ✅भारत-पाकिस्तान के समझौते से सलोत्री गांव में लौटी रौनक, विस्थापित परिवारों की घर वापसी शुरू
admin Fri, May 16, 2025
भारत और पाकिस्तान के बीच हाल ही में हुए सीमा शांति समझौते ने जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले के सीमावर्ती गांवों में नई उम्मीद की किरण जगा दी है। लंबे समय तक गोलाबारी और विस्थापन का दंश झेल चुके सलोत्री गांव के निवासी अब खुशी-खुशी अपने घरों की ओर लौटने लगे हैं।
🕊 तनाव के बाद लौटा शांति का माहौल
LoC पर महीनों से चल रही भीषण गोलाबारी के चलते सलोत्री जैसे गांव खाली हो चुके थे।
कई लोगों को अपने घर, खेती-बाड़ी, पशुधन और रोज़गार छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी थी।
अब भारत-पाकिस्तान के बीच बनी नई सहमति के बाद गांव में फिर से जीवन लौटता दिखाई दे रहा है।
🏡 "अब हमें घर जैसा महसूस हो रहा है"
गांव के निवासी अमजीद अली ने भावुक होकर कहा:
"हमने पहली बार ऐसा कुछ देखा है। सेना और प्रशासन ने हमारी सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा, लेकिन मन में डर बना हुआ था। अब शांति है, तो हम फिर से घर लौटे हैं।"
हाजी जुनियात, जो विस्थापन के समय गांव छोड़ चुके थे, ने बताया:
"करीब 400 लोग गांव छोड़ चुके थे। प्रशासन और SHO ने हमारी देखभाल की। लेकिन अभी भी चिंता है कि हमारे पास बंकर नहीं हैं। हम सरकार से मांग करते हैं कि यहां जल्द बंकर बनवाए जाएं।"
🚨 बंकर, स्वास्थ्य और शिक्षा की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि सीमा के इतने पास होने के बावजूद
पर्याप्त बंकर नहीं हैं,
स्वास्थ्य सेवाएं सीमित हैं,
और शिक्षा व रोजगार के अवसर भी बहुत कम हैं।
उन्होंने सरकार से अपील की है कि सीमा सुरक्षा के साथ-साथ मूलभूत सुविधाओं को भी मजबूत किया जाए ताकि वे डर के बिना, सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें।
🔇 “युद्ध नहीं, शांति चाहिए”
स्थानीय लोगों ने स्पष्ट संदेश दिया कि "युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं है"।
उनका कहना है कि
"जो युद्ध की बातें करते हैं, उन्हें सीमावर्ती गांवों की पीड़ा का अंदाजा नहीं होता। हम शांति और सौहार्द चाहते हैं।"
📌 निष्कर्ष:
सलोत्री गांव की घर वापसी सिर्फ एक घटना नहीं, एक प्रतीक है — शांति की ओर लौटती उम्मीद का।
भारत-पाक के बीच यह समझौता अगर कायम रहता है, तो सीमावर्ती गांवों का भविष्य न सिर्फ सुरक्षित, बल्कि सशक्त भी हो सकता है।
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