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Indian Railway : चलती ट्रेनों से बेडशीट-कंबल की चोरी! रेलवे ने जारी किए चौंकाने वाले आंकड़े, किस राज्य में हो रही सबसे ज्यादा चोरी?

Media Yodha Desk Tue, Jul 14, 2026

Indian Railway: भारतीय रेल में सफर के दौरान मिलने वाले बेडरोल को लेकर एक हैरान करने वाली और चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है. एसी कोच में सफर करने वाले यात्रियों की सहूलियत के लिए रेलवे हर दिन लाखों की संख्या में बेडरोल बांटता है, लेकिन इनमें से बड़ी तादाद में सामान गायब या चोरी हो रहे हैं. इस बेडरोल में चादर, कंबल, तकिया और तौलिया होता है. इस पूरे मामले पर रेलवे ने स्थिति साफ की है और बताया है कि कैसे चादर और तौलियों की यह गुमशुदगी रेलवे के खजाने और उसकी व्यवस्था पर भारी पड़ रही है.

रोजाना बटते हैं 8 लाख बेडरोल

अखबार इंडियन एक्सप्रेस की तरफ से दायर आरटीआई के जवाब में रेलवे ने बताया, ट्रेनों में रोजाना लगभग 8 लाख बेडरोल यात्रियों को दिए जाते हैं. एक पूरे बेडरोल सेट में आमतौर पर  2 बेडशीट, 1 कंबल, 1 तकिया, 1 तकिया कवर, 1 फेस टॉवल शामिल होता है.

अगर इस गणित को समझें, तो रेलवे को हर दिन करीब 16 लाख चादरें, 8 लाख कंबल, 8 लाख तकिए, 8 लाख तकिया कवर और 8 लाख फेस टॉवल का इंतजाम करना पड़ता है. इतनी बड़ी व्यवस्था को रोज संभालना अपने आप में एक बहुत बड़ा काम है.

सबसे ज्यादा गायब क्या होता है?

रेलवे के आंकड़ों की मानें तो गायब होने वाली चीजों में सबसे ऊपर फेस टॉवल का नाम आता है. इसका कारण यह है कि तौलिया आकार में छोटा होता है. कई बार यात्री इसे गलती से अपने बैग में रख लेते हैं, या फिर सफर में यह इतना गंदा हो जाता है कि बाद में दोबारा इस्तेमाल के लायक ही नहीं बचता. तौलिए के बाद सबसे ज्यादा गायब होने वाली वस्तु में बेडशीट यानी चादरें शामिल हैं. हालांकि, पिछले कुछ समय से यह चर्चा चल रही थी कि थर्ड एसी में तौलिया देना बंद किया जा सकता है या उसकी जगह पेपर टॉवल दिया जाएगा. हालांकि रेलवे ने इस पर रुख साफ करते हुए कहा है कि फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है.

चोरी रोकने के लिए क्या है रेलवे का नियम?

सामान की सुरक्षा और उसकी गिनती बनाए रखने के लिए रेलवे ने एक पूरी प्रक्रिया तय की है. यात्री के ट्रेन से उतरने के बाद लिनेन अटेंडेंट सभी बेडरोल वापस इकट्ठा करता है. जिस एजेंसी को बेडरोल बांटने और वापस इकट्ठा करने का ठेका दिया जाता है, सामान का पूरा हिसाब रखने की जिम्मेदारी उसी की होती है. अगर चेकिंग के दौरान बेडरोल की कोई भी वस्तु कम मिलती है या चोरी होती है, तो उसकी पूरी कीमत संबंधित एजेंसी के बिल से काट ली जाती है.

किन इलाकों और डिवीजनों में सबसे ज्यादा चोरी?

रेलवे की ओर से साझा आंकड़ों के मुताबिक, देश के 7 अलग-अलग जोन में फैले 10 डिवीजनों में ही कुल लिनेन चोरी का करीब 67% हिस्सा दर्ज किया गया है. ये प्रमुख डिवीजन राजस्थान (बीकानेर, जोधपुर, जयपुर), बिहार (सोनपुर, दानापुर, रांची), दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद और बिलासपुर को कवर करते हैं. साल 2022 के बाद से चोरी के इन मामलों में जबरदस्त उछाल देखा गया है. सबसे ज्यादा बढ़ोतरी बीकानेर डिवीजन में दर्ज की गई, जहां चोरी की संख्या 2.99 लाख से सीधे बढ़कर 12.34 लाख वस्तुओं तक पहुंच गई. इसके बाद बिहार का सोनपुर डिवीजन आता है, जहां चोरी का आंकड़ा 36,448 से बढ़कर सीधे 3.01 लाख पर पहुंच गया. हालांकि दिल्ली में चोरी का ग्राफ कम होता दिखा है.

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