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Anniversary of Pahalgam Attack : सेना ने जारी की ऑपरेशन की तस्वीरें, बताया कैसे 100 दिनों में खत्म किए पहलगाम हमले के गुनहगार

Media Yodha Desk Tue, Apr 21, 2026

Anniversary of Pahalgam Attack: एक दिन बाद 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के एक साल पूरे हो रहे हैं. इस हमले में आतंकियों ने पहलगाम की बैसरन घाटी में घूमने आए सैलानियों पर अंधाधूंध गोलीबारी की थी. आतंकियों की इस गोलीबारी में 26 लोगों की मौत हुई थी. इस हमले से पूरे देश में आक्रोश फैल गया था. आतंकियों ने लोगों ने नाम और धर्म की पूछ कर उनके घर की महिलाओं और बच्चों के सामने गोली मारी थी. पहलगाम की यह आतंकी घटना भारतीय सेना के लिए यह एक बड़ी चुनौती बनी. इस घटना के बाद भारत-पाकिस्तान के रिश्ते कटूता के नए दौर में गए. 

पहलगाम हमले के बाद भारत ने ऑपेशन सिंदूर में तबाह किए 9 आतंकी ठिकाने

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च करते हुए पाकिस्तान में मौजूद आतंकियों के 9 ठिकाने तबाह किए. इसमें 100 से ज्यादा आतंकी मारे गए. लेकिन सेना को असली कामयाबी 28 जुलाई 2025 को तब मिली, जब सेना ने ऑपेरशन महादेव के तहत पहलगाम में मौत का खूनी खेल खेलने वाले तीन आतंकियों को मौत के घाट उतारा. 

सेना ने बताया कि दाछीगाम के घने जंगलों में पहलगाम के आतंकी इस तरह छिप कर रह रहे थे.

ऑपेरशन महादेव से जुड़ी अहम जानकारियां सेना ने की साझा

पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी से दो दिन पहले सेना ने ऑपरेशन महादेव से जुड़ी कई अहम जानकारियां साझा की है. सेना ने बताया कि पहलगाम में हुए हमले के कुछ ही घंटों में सेना मौके पर पहुंच गई. घटना की जांच तुरंत शुरू की गई. प्रत्यक्षदर्शियों ने तीन आतंकियों की पहचान बताई. खुफिया जानकारी के आधार पर आतंकियों की पहचान हुई. ये तीनों लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े थे. 

सुलेमान शाह, हमजा और जिब्रान नामक आतंकी हुए थे ढेर

पहलगाम आतंकी हमले को अंजाम देने वाले आतंकियों की पहचान सुलेमान शाह, हमजा अफगानी और जिब्रान भाई के रूप में हुई. इसके बाद बड़े स्तर पर ऑपरेशन शुरू किया गया. सुरक्षा बलों की घेराबंदी से आतंकियों के भागने के रास्ते बंद किए गए. पूरे इलाके में सुरक्षा घेरा बनाया गया. आतंकी दक्षिण कश्मीर के ऊंचे इलाकों में छिपते रहे. 

हप्तानार, बुगमार, त्राल होते हुए दाछीगाम के जंगलों में छिपे थे आतंकी

आतंकी हप्तानार, बुगमार और त्राल से होते हुए आगे बढ़े. आखिर में दाछीगाम के घने जंगलों में पहुंच गए. यह इलाका बहुत कठिन और ऊंचाई वाला है. घने जंगलों में ऑपरेशन करना मुश्किल था. फिर भी सेना ने दबाव बनाए रखा. मई के अंत तक स्थिति साफ हो गई. आतंकी पकड़ से बचने की कोशिश कर रहे थे. ज्यादा देर होने पर ये आतंकी अमरनाथ यात्रा के लिए खतरा बन सकते थे. 

पहलगाम हमले के गुनाहगार तक कैसे पहुंची सेना.

बरसी से पहले जम्मू कश्मीर में बढ़ाई गई सुरक्षा

ऑपरेशन महादेव सेना की दृढ़ता का उदाहरण है. यह ऑपरेशन दिखाता है कि आतंकियों को बख्शा नहीं जाएगा. इससे लोगों का भरोसा और मजबूत हुआ. देश की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता फिर साबित हुई. इस बीच पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी से पहले जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है. सीमाई इलाकों के साथ-साथ सेना और पुलिस के जवान विशेष चौकसी बरत रहे हैं. 

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