बीजापुर (छत्तीसगढ़): : बस्तर में कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों पर नक्सलियों के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा ऑपरेशन जारी, सुरक्षाबलों ने बनाया दबदबा
छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के बीजापुर जिले में कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों पर पिछले सात दिनों से नक्सलियों के खिलाफ सबसे बड़ा ऑपरेशन चलाया जा रहा है। भीषण गर्मी और कठिन हालात के बावजूद हजारों जवान नक्सलियों के गढ़ में गहराई तक पहुंचकर ऑपरेशन को सफल बना रहे हैं।
🛡️ बीजापुर में जारी है मुठभेड़, सुरक्षाबलों ने कसा शिकंजा
आईजी बस्तर सुंदरराज पी और डीआईजी कमलोचन कश्यप की निगरानी में ऑपरेशन तेजी से आगे बढ़ रहा है। पुजारी कांकेर, नम्बी, गलगल के जंगलों से लेकर पुसगुप्पा और भीमारम क्षेत्रों में रुक-रुक कर मुठभेड़ हो रही है। सुरक्षाबलों की रणनीति से माओवादी दबाव में आ गए हैं और शांतिवार्ता के प्रयास कर रहे हैं।
🌄 कर्रेगुट्टा: नक्सलियों का गढ़, अब बना सुरक्षाबलों का ठिकाना
कर्रेगुट्टा पहाड़ी करीब 290 किलोमीटर लंबी है, जो छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और तेलंगाना तक फैली है।
यहीं पर नक्सली टॉप कमांडर हिडमा और देवा के छिपे होने की सूचना है।
यह क्षेत्र नक्सलियों की PLGA बटालियन नंबर 1 का मजबूत बेस रहा है।
छत्तीसगढ़ से CRPF, DRG, STF, कोबरा, तेलंगाना से ग्रे हाउंड, और महाराष्ट्र से C-60 कमांडोज इस अभियान में जुटे हैं।
💣 जंगलों में बिछाए गए 100 से ज्यादा IEDs का पता चला
जवान लगातार सर्च ऑपरेशन कर रहे हैं। अभी तक
100 से ज्यादा IED बम प्लांट किए जाने की सूचना मिली है।
28 अप्रैल को जवानों ने जंगल के रास्ते में एक बीयर बम बरामद किया।
27 अप्रैल को सर्चिंग के दौरान दुर्गमराज गुट्टा और कर्रेगुट्टा के बीच एक विशाल गुफा मिली, जो नक्सलियों का सुरक्षित ठिकाना थी। गुफा में 1000 से अधिक लोग एक साथ रह सकते थे।
🚁 जवानों का अदम्य साहस: भीषण गर्मी और घायल होने के बावजूद मोर्चा संभाले हुए
26 अप्रैल को गलगम क्षेत्र में डीआरजी जवान IED ब्लास्ट में घायल हुए।
27 अप्रैल को कर्रेगुट्टा में जवान मुंसिफ खान भी आईईडी ब्लास्ट में घायल हुए।
लगभग 45 डिग्री तापमान में ऑपरेशन के दौरान 15 जवानों की तबीयत बिगड़ी, जिन्हें हेलीकॉप्टर से वेंकटापुरम (तेलंगाना) इलाज के लिए भेजा गया।
फिर भी जवान पूरे हौसले से ऑपरेशन को आगे बढ़ा रहे हैं।
🎯 नक्सल ऑपरेशन से जुड़े प्रमुख बिंदु:
अब तक कई इलाकों में सुरक्षाबलों ने नक्सली ठिकानों पर कब्जा कर लिया है।
ड्रोन और अन्य आधुनिक तकनीकों से जंगलों पर नजर रखी जा रही है।
ऑपरेशन का मुख्य लक्ष्य नक्सलियों के टॉप लीडरों तक पहुंच बनाना और इलाके को नक्सलमुक्त करना है।

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