19th April 2026

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: सरेंडर नक्सलियों ने अमित शाह के समक्ष खोले माओवादी जुल्मों के राज

जगदलपुर: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के छत्तीसगढ़ दौरे के दौरान सरेंडर करने वाले नक्सलियों ने माओवादी संगठन के भीतर हो रहे अत्याचारों की परतें खोलीं। रविवार को हुए संवाद में पूर्व नक्सलियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि संगठन में उनके साथ किस तरह का अमानवीय व्यवहार किया जाता था।

शादी के लिए नसबंदी का दबाव

एक पूर्व नक्सली ने खुलासा किया कि संगठन में यदि कोई काडर शादी करना चाहता है, तो उसे पहले नसबंदी करवानी पड़ती है। यह नियम महिलाओं और पुरुषों दोनों पर लागू होता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शादीशुदा काडर बच्चों के प्रति जिम्मेदार न हो सके और संगठन के लिए पूरी तरह समर्पित रहे।

महिलाओं पर विशेष जुल्म

महिला नक्सलियों ने बताया कि उन्हें संगठन में जबरन भयानक परिस्थितियों में काम करना पड़ता था। कई बार वरिष्ठ माओवादी नेता उनका शोषण करते थे और आवाज उठाने पर गंभीर सजा दी जाती थी।

संगठन की सच्चाई का अहसास

सरेंडर करने वाले एक अन्य नक्सली ने कहा, "मैंने संगठन में इस उम्मीद के साथ कदम रखा था कि यह गरीबों के हक की लड़ाई लड़ेगा, लेकिन जल्द ही मुझे एहसास हुआ कि यह सिर्फ सत्ता और धन के लिए एक षड्यंत्र है।"

नक्सलवाद छोड़ने का फैसला

नक्सलियों ने बताया कि लंबे समय तक हिंसा और शोषण झेलने के बाद उन्हें अहसास हुआ कि माओवादी आंदोलन का हिस्सा बने रहना उनके और उनके परिवार के लिए विनाशकारी है। कई नक्सलियों ने कहा कि आत्मसमर्पण के बाद उन्हें सरकार और समाज से जो समर्थन मिला है, उससे उनका जीवन अब सही दिशा में बढ़ रहा है।

अमित शाह का संदेश

गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सलियों से मुख्यधारा में शामिल होने की अपील करते हुए कहा, "हिंसा का रास्ता छोड़ें और समाज के विकास में योगदान दें। सरकार आपके पुनर्वास और बेहतर भविष्य के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।"

सरेंडर और पुनर्वास की योजना

सरकार की पुनर्वास नीति के तहत सरेंडर करने वाले नक्सलियों को रोजगार, शिक्षा और समाज में पुनः स्थापित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। बस्तर में इन योजनाओं को तेजी से लागू किया जा रहा है। यह संवाद माओवादी हिंसा से प्रभावित लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने और क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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