बिलासपुर (छत्तीसगढ़): : बिलासपुर: भारतमाला प्रोजेक्ट में निलंबित पटवारी ने की आत्महत्या, फर्जीवाड़े में फंसाने का लगाया आरोप
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है, जहां भारतमाला परियोजना के तहत हुई जांच में निलंबन झेल रहे पटवारी सुरेश कुमार मिश्रा (62 वर्ष) ने आत्महत्या कर ली। उनका शव सकरी थाना क्षेत्र के जोकी गांव में स्थित अपनी बहन के फार्महाउस में मिला। पटवारी मिश्रा को हाल ही में फर्जी मुआवजा प्रकरण में निलंबित किया गया था।
📌 30 जून को होने वाले थे रिटायर, 27 जून को ली जान
परिजनों और सूत्रों के अनुसार, सुरेश मिश्रा आगामी 30 जून को सेवानिवृत्त होने वाले थे। लेकिन निलंबन और एफआईआर के बाद वे काफी मानसिक तनाव में थे। इसी तनाव के चलते उन्होंने 27 जून को यह आत्मघाती कदम उठाया।
📄 घटनास्थल से मिले दो सुसाइड नोट, खुद को बताया निर्दोष
पुलिस ने मौके से दो पत्र बरामद किए हैं। इनमें से एक पत्र में उन्होंने खुद को बेगुनाह बताते हुए लिखा:
“मैं निर्दोष हूं। मुझे जानबूझकर फंसाया गया है। मेरे ऊपर जो आरोप लगाए गए हैं, वे बेबुनियाद हैं।”
दूसरे पत्र में उन्होंने निलंबन से बहाली की अपील के साथ कुछ व्यक्तियों के नाम भी लिए हैं, जिनमें एक कोटवार और दो अन्य शामिल हैं। उन्होंने अपने पत्र में अपनी बीमारी का भी जिक्र किया है।
🛣️ क्या है भारतमाला प्रोजेक्ट फर्जीवाड़े का मामला?
भारत सरकार की महात्वाकांक्षी भारतमाला योजना के तहत बिलासपुर-उरगा राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए भूमि अधिग्रहण किया गया था। जांच में सामने आया कि ढेका गांव के कुछ जमीन मालिकों के नाम फर्जी दस्तावेजों के जरिए राजस्व रिकॉर्ड में जोड़ दिए गए और गलत मुआवजा प्रकरण तैयार किए गए।
इस मामले में पटवारी सुरेश मिश्रा को 25 जून को निलंबित कर दिया गया था और तोरवा थाना में उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई थी। उनके साथ एक अन्य व्यक्ति पर भी मामला दर्ज किया गया था
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