19th April 2026

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: उत्तर बस्तर के जंगलों में 129 इनामी नक्सली सक्रिय, सरकार और सुरक्षा बलों के बीच आर-पार की लड़ाई जारी

उत्तर बस्तर के घने जंगलों में नक्सलियों की मौजूदगी एक बार फिर सुर्खियों में है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, क्षेत्र में करीब 129 इनामी नक्सली सक्रिय हैं, जो सुरक्षा बलों और आम जनता के लिए गंभीर चुनौती बने हुए हैं। राज्य सरकार और सुरक्षा एजेंसियां इन नक्सलियों का मुकाबला करने के लिए व्यापक अभियान चला रही हैं।

नक्सलियों की रणनीतिक गतिविधियां

  • संगठनात्मक मजबूती: नक्सलियों ने उत्तर बस्तर के दुर्गम इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत की है। यहां गढ़ी गई बस्तियां और गुप्त ठिकाने उन्हें सुरक्षा बलों से बचने में मदद करते हैं।
  • प्रमुख इनामी नक्सली: सुरक्षा एजेंसियों ने 129 नक्सलियों की सूची जारी की है, जिन पर इनाम घोषित किया गया है। इनमें से कई नक्सली करोड़ों रुपये के इनामी हैं और लंबे समय से मोस्ट वांटेड हैं।
  • सामाजिक गतिविधियां: नक्सली ग्रामीण इलाकों में युवाओं को भड़काने और अपने संगठन में शामिल करने की कोशिश कर रहे हैं।

सुरक्षा बलों की रणनीति

  1. सर्च ऑपरेशन: राज्य पुलिस, सीआरपीएफ, और अन्य केंद्रीय सुरक्षा बलों ने संयुक्त अभियान तेज कर दिया है।
  2. ड्रोन सर्विलांस: जंगलों में नक्सलियों के ठिकानों की पहचान के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल हो रहा है।
  3. स्थानीय सहयोग: ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है ताकि वे नक्सलियों के खिलाफ आवाज उठाएं और सुरक्षा बलों का समर्थन करें।
  4. सरेंडर पॉलिसी: सरकार ने नक्सलियों को मुख्यधारा में लाने के लिए पुनर्वास योजनाएं भी शुरू की हैं।

सरकार का रुख

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा है कि सरकार नक्सलवाद के समूल खात्मे के लिए प्रतिबद्ध है।
  • मुख्यमंत्री का बयान: "हम हिंसा के रास्ते पर चल रहे युवाओं को समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए पूरी तरह प्रयासरत हैं। जो हथियार छोड़कर सरेंडर करेंगे, उन्हें पुनर्वास का पूरा लाभ दिया जाएगा।"
  • विकास कार्य: बस्तर में सड़कों, स्कूलों और स्वास्थ्य सेवाओं जैसे बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।

सामाजिक प्रभाव

  • नक्सल प्रभावित इलाकों में डर और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।
  • ग्रामीणों को दोनों पक्षों—सुरक्षा बलों और नक्सलियों—से दबाव झेलना पड़ता है।
  • क्षेत्र में विकास कार्यों की गति धीमी है, जिससे जनता को मूलभूत सुविधाओं की कमी झेलनी पड़ रही है।

भविष्य की योजनाएं

सरकार और सुरक्षा बल आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। नक्सल प्रभावित इलाकों में अभियान और तेज किया जाएगा। इसके साथ ही सामाजिक और आर्थिक विकास को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि नक्सलियों की जड़ें कमजोर की जा सकें।

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