: प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत कोरबा में प्रशिक्षण की शुरुआत, कारीगरों को मिलेगा आत्मनिर्भर बनने का अवसर
admin Sat, Nov 23, 2024
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना (PM Vishwakarma Yojana) के तहत कोरबा के आजीविका कॉलेज में कड़ी मेहनत करने वाले कारीगरों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य शिल्पकला में पारंगत कारीगरों को अपनी कड़ी मेहनत का फल और आत्मनिर्भर बनने का अवसर देना है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में चयनित लाभार्थियों को फूलों की माला बनाने, कृत्रिम माला, गुलदस्ते और सजावट के काम में विशेषज्ञता हासिल करने का मौका मिल रहा है। लाभार्थियों को मिल रहा है स्टाइपेंड और उपकरण किट इस योजना के तहत लाभार्थियों को प्रशिक्षण के दौरान प्रतिदिन 500 रुपये का स्टाइपेंड भी दिया जा रहा है। यह स्टाइपेंड उन्हें न केवल प्रशिक्षण के लिए प्रेरित कर रहा है, बल्कि यह आर्थिक सहायता के रूप में उनकी मदद भी कर रहा है। प्रशिक्षण समाप्त होने के बाद, लाभार्थियों को एक उपकरण किट भी दी जाएगी, जिसकी मदद से वे अपने काम को आगे बढ़ा सकेंगे। इस किट के जरिए वे अपने व्यवसाय की शुरुआत कर सकेंगे और अपनी आजीविका को मजबूत कर सकेंगे। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत ऋण की सुविधा प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसके तहत लाभार्थियों को 3 लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। इस ऋण से कारीगर अपना व्यवसाय शुरू करने और उसे बढ़ाने में सक्षम होंगे। इसके अलावा, योजना का उद्देश्य इन कारीगरों को वित्तीय रूप से सशक्त बनाना है, ताकि वे अपनी पारंपरिक कला को आगे बढ़ा सकें और रोजगार उत्पन्न कर सकें। लाभार्थियों की सफलता की ओर बढ़ते कदम ललित, जो इस प्रशिक्षण में भाग ले रहे हैं, बताते हैं कि यह प्रशिक्षण उनके लिए बहुत फायदेमंद साबित होगा। वे कहते हैं, "हमें 500 रुपये प्रति दिन का स्टाइपेंड मिल रहा है, जो हमारे लिए बहुत मददगार है। हम यहां माला, गुलदस्ता और सजावट बनाने की कला सीख रहे हैं। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद, मैं इसे अपने व्यवसाय के रूप में शुरू करूंगा। मुझे 1 लाख रुपये तक का ऋण भी मिलेगा, जिससे मैं अपने काम को आगे बढ़ा सकता हूं।" द्वितीय लाभार्थी, धनेश्वरी राय, जो माला बनाने का प्रशिक्षण ले रही हैं, कहती हैं, "मैं पहले से ही माला बनाने का काम जानती थी, लेकिन अब मैं इसे नए तरीके से सीख रही हूं। इस प्रशिक्षण से मुझे भविष्य में काफी मदद मिलेगी। इसके बाद मुझे 15 हजार रुपये की कीमत वाला एक उपकरण किट मिलेगा, जिससे मैं अपना कार्य शुरू कर सकूंगी। " धनेश्वरी ने आगे कहा, "इस योजना के तहत मुझे ऋण मिलेगा, और मैं इसे जल्द ही चुका दूंगी, क्योंकि मेरा काम अब बेहतर तरीके से चलेगा।" आजीविका कॉलेज का योगदान आजीविका कॉलेज के प्रधानाचार्य अरुणेन्द्र मिश्रा ने बताया कि हम प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत माला बनाने के कारीगरों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। हमने 214 आवेदन प्राप्त किए थे, जिनमें से 144 कारीगरों को प्रशिक्षण के लिए उपयुक्त पाया गया। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण समाप्त होने के बाद सभी लाभार्थियों को 4000 रुपये का स्टाइपेंड और 15 हजार रुपये की कीमत वाली एक उपकरण किट दी जाएगी। इसके बाद, उन्हें एक लाख रुपये का ऋण मिलेगा, जिसे वे 18 महीनों के भीतर चुकता कर सकते हैं। ऋण की यह प्रक्रिया आत्मनिर्भरता की दिशा में एक कदम और बढ़ने का अवसर है। आत्मनिर्भरता की दिशा में एक कदम प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के माध्यम से कारीगरों को न केवल अपनी पारंपरिक कला को बढ़ावा देने का अवसर मिल रहा है, बल्कि यह उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में भी अग्रसर कर रहा है। इस योजना से कई लोग अपने व्यवसाय की शुरुआत करने में सक्षम होंगे और साथ ही अपने परिवारों के लिए रोजगार के नए अवसर उत्पन्न करेंगे। इस प्रकार, प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना को आत्मनिर्भर भारत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना देशभर के कारीगरों और शिल्पियों के लिए एक सुनहरा अवसर साबित हो रही है। यह योजना उन्हें अपने पारंपरिक कार्यों को आगे बढ़ाने और एक सशक्त व्यवसाय की शुरुआत करने का अवसर प्रदान करती है। आजीविका कॉलेज के माध्यम से कोरबा में शुरू किए गए इस प्रशिक्षण कार्यक्रम से कारीगरों को अपनी कला में निखार लाने और आत्मनिर्भर बनने का मौका मिलेगा, जो उनके भविष्य को संवारने में मदद करेगा।विज्ञापन
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