22nd June 2026

BREAKING NEWS

छत्तीसगढ़ HC की राज्य सरकार को सख्त फटकार, 6 महीने में नियुक्ति नहीं तो MBBS छात्रों का सर्विस बॉन्ड होगा खत्म

आज छत्तीसगढ़ दौरे पर राहुल गांधी, कांग्रेस जिलाध्यक्षों संग करेंगे अहम बैठक

स्टेपनी टायर में छिपाकर हो रही थी गांजा तस्करी, पुलिस ने 3 तस्करों को किया गिरफ्तार

मुंगेली एसपी भोजराम पटेल ने की लंबित अपराधों और कानून व्यवस्था की समीक्षा

सेंट्रल जेल में बंद आरोपी भी देगा परीक्षा, स्पेशल टीम पहुंची सेंटर

Advertisment

Chhattisgarh : युक्तियुक्तकरण में गड़बड़झाला! एक पद पर दो प्रधानपाठक, HC ने DEO को किया तलब

Media Yodha Desk Sun, Feb 8, 2026

बिलासपुर : शिक्षक युक्तियुक्तकरण के दौरान एक महिला शिक्षिका की पदस्थापना से जुड़े मामले में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने जिला शिक्षा अधिकारी के खिलाफ कड़ी टिप्पणी की है। न्यायालय ने डीईओ को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। मामले के अनुसार, चित्ररेखा तिवारी शासकीय कन्या माध्यमिक शाला, तारबहार में प्रधानपाठिका के पद पर पदस्थ थीं। शिक्षक युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया के तहत उनका स्थानांतरण शासकीय माध्यमिक शाला, गतौरा (मस्तूरी विकासखंड) कर दिया गया। मगर, उस विद्यालय में पहले से ही एक प्रधानपाठक पदस्थ था, जिसके कारण चित्ररेखा तिवारी को पुरानी जगह पर ही कार्य करना पड़ा।

इस स्थिति को देखते हुए शिक्षिका का अभ्यावेदन स्वीकार किया गया। उन्हें अन्यत्र पदस्थ किया जाना था, लेकिन लंबे समय तक कोई आदेश जारी नहीं किया गया। मानसिक रूप से परेशान होकर चित्ररेखा तिवारी ने न्यायालय की शरण ली। उनकी याचिका 31 जनवरी को हाईकोर्ट में पंजीबद्ध हुई। याचिका दायर होने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जल्दबाजी में एक नया आदेश जारी किया गया, जिसमें चित्ररेखा तिवारी को शासकीय माध्यमिक शाला, फरहदा में पदस्थ दिखाया गया। सरकारी पक्ष ने अदालत को बताया कि यह आदेश 30 जनवरी को जारी किया गया था। लेकिन जब आदेश न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया, तो याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने आपत्ति उठाई।

6 फरवरी को सुनवाई के दौरान अधिवक्ता ने अदालत का ध्यान इस ओर दिलाया कि याचिका में स्पष्ट रूप से वह केस नंबर दर्ज है, जो 31 जनवरी को पंजीबद्ध हुआ, जबकि पदस्थापना आदेश को 30 जनवरी का बताया जा रहा है। इससे यह स्पष्ट हुआ कि आदेश बैकडेट में तैयार किया गया और अदालत को गुमराह करने का प्रयास किया गया। इसके बाद न्यायालय ने कड़ी टिप्पणी करते हुए जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे को 11 फरवरी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि बैकडेट आदेश क्यों जारी किया गया और उसे अदालत में क्यों प्रस्तुत किया गया।

विज्ञापन

जरूरी खबरें

विज्ञापन