20th June 2026

BREAKING NEWS

चरित्र शंका में पति बना हैवान, पत्नी का मुंडन कर जबरन पिलाया पेशाब, आरोपी पुलिस गिरफ्त में

23 जिलों में 31 जनकल्याणकारी योजनाओं का होगा संतृप्तिकरण

बलौदाबाजार हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, छत्तीसगढ़ सरकार से मांगा जवाब

NEET 2026 अभ्यर्थियों को रेलवे की बड़ी सौगात, 10 ट्रेनों में लगाए गए 40 अतिरिक्त जनरल कोच

रेल यात्रियों को बड़ा झटका! छत्तीसगढ़ से गुजरने वाली कई ट्रेनें रद्द, सफर से पहले देखें पूरी लिस्ट

Advertisment

फायर NOC खत्म होने से बढ़ी परेशानी : स्कूल-हॉस्पिटल पर संकट, ऑडिट के नाम पर निजी कंपनियों की मनमानी

Media Yodha Desk Sat, Mar 21, 2026

रायपुर : प्रदेश में अब तक सरकारी स्तर पर निःशुल्क होने वाली फायर एनओसी प्रक्रिया को निजी कंपनियों के हवाले कर दिया गया है. नई व्यवस्था के तहत निजी एजेंसियां फायर ऑडिट के लिए 10 रुपए प्रति वर्गफीट तक शुल्क ले रही हैं. इसका सीधा असर स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों और अन्य संस्थानों पर पड़ेगा, जिससे शिक्षा और इलाज महंगी होने की आशंका है. मौजूदा व्यवस्था में यदि किसी अस्पताल या भवन का क्षेत्रफल 50 हजार वर्गफीट है, तो उसे सिर्फ फायर ऑडिट के लिए हर साल करीब 5 लाख रुपए तक खर्च करने पड़ सकते हैं. छोटे संस्थानों के लिए भी यह राशि हजारों से लेकर लाखों रुपए तक पहुंच रही है. अंबिकापुर के निजी अस्पताल संचालकों ने इस शुल्क पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि इतनी अधिक राशि देना छोटे अस्पतालों के लिए मुश्किल होगा.

सबसे बड़ा सवाल यह है कि अग्निशमन विभाग के पास प्रशिक्षित अधिकारी और तकनीकी स्टाफ मौजूद होने के बावजूद ऑडिट की जिम्मेदारी निजी कंपनियों को क्यों सौंपी गई. पहले ऑनलाइन आवेदन के बाद जिला कमांडेंट की टीम मौके पर निरीक्षण करती थी और मुख्यालय से फायर एनओसी जारी होती थी. यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और निःशुल्क थी. अब वही प्रक्रिया निजी एजेंसियों से कराई जा रही है और ऑडिट के नाम पर बड़ी राशि वसूली जा रही है.

10 रु. वर्ग फीट के हिसाब से फीस

सरगुजा में मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल सहित 18 निजी अस्पताल, 24 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 193 उप स्वास्थ्य केंद्र, करीब 2365 स्कूल, 15 कॉलेज और अन्य निजी संस्थान हैं, जिन पर फायर ऑडिट के नाम पर लाखों रुपए का अतिरिक्त खर्च पड़ेगा. इसका असर भी दिखने लगा है. ओजस हॉस्पिटल के संचालक डॉ. नवीन द्विवेदी ने बताया कि कंपनी द्वारा 10 रुपए वर्गफीट शुल्क मांगे जाने से उन्होंने ऑडिट नहीं कराया.

हॉस्पिटल को 70 हजार का थमाया बिल

फायर ऑडिट के लिए बिलासपुर की कंपनी ने राजधानी के एक हॉस्पिटल को 70,800 रुपए का बिल थमाया है, जिसमें 10,800 रुपए जीएसटी है. हॉस्पिटल प्रबंधन का कहना है कि कंपनी की ओर से लिया जा रहा शुल्क बहुत ज्यादा है. जिसे हम देना नहीं चाहते. भले ही ऑडिट न हो. दूसरे अस्पताल के संचालक भी ऑडिट पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इतनी अधिक फीस अस्पतालों और अन्य संस्थानों पर आर्थिक बोझ है.

सरकार को भी मिलेगा एनओसी फीस का हिस्सा

गृह विभाग में प्रमुख सचिव मनोज कुमार पिंगुआ ने चर्चा में बताया कि एनओसी पहले निशुल्क थी, इससे सरकार को कुछ आय नहीं होती थी. अब कंपनियां यह काम करेंगी, जिससे सरकार को एनओसी फीस का कुछ हिस्सा मिलेगा. राशि कितनी है, अभी ये नहीं बता पाऊंगा. वहीं फीस के संबंध में उन्होंने बताया कि कुछ शिकायतें आ रही हैं. एजेंसी मनमानी करेगी, तो कार्रवाई करेंगे. वहीं एनओसी मिलने के बाद फायर सेफ्टी की कमी से हादसे पर जिम्मेदारी किसकी होगी? इस सवाल पर उन्होंने कहा कि कंपनियों का काम सिर्फ ऑडिट करना है. समय- समय पर मॉनिटरिंग होगी.

विज्ञापन

जरूरी खबरें

विज्ञापन