सुप्रीम कोर्ट से सशर्त ज़मानत : रानू साहू, सौम्या चौरसिया समेत छह आरोपी कोल लेवी और डीएमएफ घोटाले में दो साल बाद जेल से रिहा
admin Sat, May 31, 2025
रायपुर | 29 मई 2025 — छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोल लेवी और डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (DMF) घोटाले में बड़ी अपडेट सामने आई है। इस घोटाले के मुख्य आरोपियों में शामिल निलंबित IAS अधिकारी रानू साहू, पूर्व डिप्टी सेक्रेटरी सौम्या चौरसिया समेत 6 लोगों को सुप्रीम कोर्ट से सशर्त जमानत मिल गई है। शनिवार को सभी आरोपी रायपुर सेंट्रल जेल से बाहर आ गए।
⚖️ सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत, मगर कई शर्तें
सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों को सशर्त ज़मानत देते हुए कहा कि वे फिलहाल छत्तीसगढ़ से बाहर रहेंगे और जहां भी रहेंगे, वहां के संबंधित थाने को स्थायी पता उपलब्ध कराना होगा। ये सभी आरोपी करीब दो साल से जेल में बंद थे।
👥 इन आरोपियों को मिली ज़मानत
रानू साहू (निलंबित IAS अधिकारी)
सौम्या चौरसिया (पूर्व डिप्टी सेक्रेटरी)
समीर बिश्नोई (खनिज विभाग के तत्कालीन संचालक)
लक्ष्मीकांत तिवारी
संदीप नायक
वीरेंद्र जायसवाल
💼 क्या है कोल लेवी स्कैम?
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच के अनुसार, छत्तीसगढ़ में ऑनलाइन कोयला परमिट को ऑफलाइन करके एक सिंडिकेट के माध्यम से 570 करोड़ रुपये से ज्यादा की अवैध वसूली की गई थी। इस घोटाले का मास्टरमाइंड कोल कारोबारी सूर्यकांत तिवारी को माना गया है।
सिंडिकेट के सदस्य व्यापारी से प्रति टन ₹25 की दर से लेवी वसूलते थे और उसे पीट पास (Permit) जारी किया जाता था।
🔍 रानू साहू की भूमिका
ED के मुताबिक, जब रानू साहू कोरबा की कलेक्टर थीं, तब उनके और सूर्यकांत तिवारी के बीच करीबी संबंध थे। आरोप है कि सूर्यकांत तिवारी से कमीशन के रूप में मिली घूस की रकम से उन्होंने संपत्तियाँ खरीदीं। ED ने ₹5.52 करोड़ की संपत्ति अटैच की है। 21 जुलाई 2023 को दूसरी बार ईडी की रेड के बाद उनकी गिरफ्तारी हुई थी।
🧑💼 कौन हैं सौम्या चौरसिया?
सौम्या चौरसिया छत्तीसगढ़ शासन की पूर्व उप सचिव रही हैं और कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्यों में भूमिका निभा चुकी हैं। उन पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है और ED ने उन्हें गिरफ्तार किया था। हाईकोर्ट से राहत न मिलने पर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।
🧾 क्या है DMF घोटाला?
District Mineral Foundation (DMF) से जुड़े टेंडरों में भारी घोटाले और अनियमितताओं का आरोप है। EOW ने 120B और 420 धाराओं के तहत केस दर्ज किया। टेंडर प्रक्रिया में मनचाहे लोगों को ठेका देकर करोड़ों की हेराफेरी की गई। इसमें बिचौलियों और ठेकेदारों की मिलीभगत सामने आई।
🔦 अब आगे क्या?
हालांकि सभी आरोपी जेल से बाहर आ चुके हैं, लेकिन जांच प्रक्रिया अब भी जारी है। सुप्रीम कोर्ट की शर्तों का उल्लंघन करने पर ज़मानत रद्द की जा सकती है। ED और अन्य एजेंसियां संपत्ति जब्ती, दस्तावेज़ी सबूत और मनी ट्रेल पर काम कर रही हैं।
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