: छत्तीसगढ़ में धान खरीद का काम जारी, लेकिन डुर्ग में धान उठाने में हो रही है भारी देरी
admin Thu, Nov 28, 2024
14 नवंबर 2024 से छत्तीसगढ़ में धान खरीद की प्रक्रिया शुरू हो गई है और लगातार इस काम में तेजी से काम हो रहा है। हालांकि, डुर्ग जिले में धान उठाने में देरी होने के कारण समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। यहां, कस्टम मिलिंग के लिए मिलरों का पंजीकरण अभी तक शुरू नहीं हुआ है और न ही कलेक्शन सेंटर अभी तक स्थापित हुए हैं। इस वजह से धान के बड़े पैमाने पर जमाव की समस्या उत्पन्न हो गई है।
डुर्ग में धान उठाने में देरी
डुर्ग जिले के धान केंद्रों और खरीद केंद्रों में धान की उठाई नहीं हो पा रही है। नतीजतन, जिले के खरीद केंद्रों में 5 लाख 36 हजार 665 क्विंटल धान फंसा हुआ है। जिले के 16 खरीद केंद्रों में धान की सीमा से अधिक मात्रा जमा हो गई है। हाल ही में, सहकारी समिति के कर्मचारियों ने इन मुद्दों को लेकर हड़ताल की थी, लेकिन इसके बावजूद धान उठाने का काम नहीं शुरू हो पाया है।राहतadah सरकार समिति में धान का जमाव
डुर्ग जिले के 87 सहकारी समितियों में कुल 102 खरीद केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों में से राहतadah सरकारी समिति, धामधा विकास खंड में सबसे अधिक प्रभावित है। यहां 720 टन की सीमा के बावजूद 1169.80 टन धान खुले आसमान के नीचे पड़ा हुआ है। अन्य खरीद केंद्रों की स्थिति भी इससे मिलती-जुलती है, जहां धान की सीमा पार हो चुकी है।धान के जमाव से नुकसान का खतरा
डुर्ग जिले के अन्य धान खरीद केंद्रों की स्थिति भी चिंताजनक है। उदाहरण के लिए, डोरकी खरीद केंद्र की सीमा 720 टन है, लेकिन यहां वर्तमान में 1118 टन धान जमा है। फेकरी खरीद केंद्र में भी 720 टन की सीमा के बावजूद 1060 टन धान पड़ा हुआ है। इसके अलावा, अंडा, जमगांव आर, दीदाभाठ, डामोद, निकुम, निपानी, बटोल, बारहापुर, रौंडा, सुरपा और सेलुद जैसे अन्य केंद्रों में भी धान की सीमा पार हो गई है। इस धान के खुले में पड़े रहने से सूखने का खतरा बना हुआ है, जिससे समितियों को भारी नुकसान हो सकता है।कस्टम मिलिंग के लिए धान उठाने के प्रयास
जिला विपणन अधिकारी, भौशिक बघेल ने बताया कि पहले कस्टम बिलिंग के लिए धान उठाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस समय धान खरीद के पहले के बकाया भुगतान भी लंबित हैं, और राज्य सरकार पर 500 करोड़ रुपये का बकाया है। इस कारण से धान की उठाई में समस्या आ रही है। उन्होंने सरकार से जल्द धन जुटाने के लिए उचित कदम उठाने की अपील की है, ताकि सरकार और चावल मिलों को होने वाले नुकसान को रोका जा सके।सरकार की जिम्मेदारी
चाहे धान खरीद में देरी हो रही हो, लेकिन इसका असर न केवल किसानों पर बल्कि सरकार और मिलों पर भी पड़ रहा है। ऐसे में सरकार को इस संकट से निपटने के लिए शीघ्र कदम उठाने की जरूरत है, ताकि किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य मिले और सरकारी योजनाओं के लाभ में कोई विघ्न न आये। (SEO Keywords: छत्तीसगढ़ धान खरीद, डुर्ग धान खरीद समस्या, सहकारी समितियां, कस्टम मिलिंग, छत्तीसगढ़ कृषि समाचार, धान उठाई समस्या)विज्ञापन
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