अमरावती : आंध्र प्रदेश में शराब घोटाले का बड़ा खुलासा: सोने में दी गई करोड़ों की रिश्वत, SIT की जांच में माफिया नेटवर्क उजागर
admin Tue, May 20, 2025
आंध्र प्रदेश में शराब कारोबार से जुड़ा एक बड़ा भ्रष्टाचार घोटाला सामने आया है, जिसमें सरकारी अधिकारियों, शराब आपूर्तिकर्ताओं और भट्टियों की मिलीभगत उजागर हुई है। यह घोटाला पिछली वाईएसआरसीपी सरकार के कार्यकाल से जुड़ा बताया जा रहा है, जहां शराब माफिया सिंडिकेट को सोने के रूप में करोड़ों रुपये की रिश्वत दी गई।
🔍 कार में मिली रसीद से खुली पोल
शराब घोटाले का खुलासा तब हुआ जब आंध्र प्रदेश बेवरेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (APBCL) के पूर्व एमडी वासुदेव रेड्डी की कार से एक रसीद मिली। इस रसीद ने रिश्वत के अवैध नेटवर्क की परतें खोल दीं। जांच में पाया गया कि शराब माफिया ने शराब की आधार कीमत का 20% तक रिश्वत के रूप में वसूला, जिसे सोने के रूप में छिपाया गया।
🪙 सोने में दी गई रिश्वत, बुलियन कारोबारियों की भूमिका
रिश्वत के पैसे को सोने की खरीदारी के जरिए सफेद किया गया। बुलियन व्यापारियों और ज्वेलरी शॉप्स के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग की पूरी योजना बनाई गई, जिसमें बड़े पैमाने पर फर्जी GST बिल और कपड़े/गहनों के नकली लेनदेन को शामिल किया गया।
SIT ने जिन डीलरों की पहचान की है उनमें शामिल हैं:
पद्मावती ज्वेलरी शॉप
तायल एंटरप्राइजेज
सोनाचंदी ज्वेलर्स
उदय ज्वेलरी इंडस्ट्रीज
💰 300-400 करोड़ रुपये के संदिग्ध ट्रांजैक्शन, आंकड़ा 1,000 करोड़ तक पहुंच सकता है
विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट के मुताबिक, 300-400 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन सामने आए हैं। अधिकारियों का मानना है कि यदि जांच गहराई से हुई तो यह आंकड़ा 1,000 करोड़ रुपये से अधिक तक जा सकता है।
उदाहरण के तौर पर, तिलकनगर इंडस्ट्रीज, जो मेंशन हाउस ब्रांडी सप्लाई करती है, ने कथित तौर पर 280 करोड़ रुपये की रिश्वत दी, जिसमें से 196 करोड़ रुपये सोने के रूप में दिए गए।
⚠️ रिश्वत न देने वाले ब्रांडों को हटाया गया, जनता की सेहत से खिलवाड़
पिछली सरकार की शराब नीति के अनुसार, रिश्वत न देने वाली कंपनियों के ब्रांडों को स्टॉक से हटाकर, उनकी जगह कम गुणवत्ता वाली या अचिह्नित शराब को जगह दी गई। इससे न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान हुआ, बल्कि जनता के स्वास्थ्य पर भी संकट आया।
🎒 कैसे पहुंचता था सोना 'लाभार्थियों' तक?
रिश्वत को बैग में भरकर 'चाणक्य उर्फ प्रकाश' जैसे गुर्गों के माध्यम से पहुंचाया जाता था
नकद को पहले सोने में बदला जाता, ताकि उसका ट्रैक न मिले
लेनदेन को कागज पर व्यवस्थित और वैध दिखाया जाता था
📦 गली जनार्दन रेड्डी जैसे पुराने मामलों से मिलती-जुलती रणनीति
जांच एजेंसियों का कहना है कि यह रैकेट कुख्यात खनन घोटालेबाज गली जनार्दन रेड्डी जैसी ही रणनीति पर काम कर रहा था — राजनीतिक संरक्षण, सोने में निवेश, मनी लॉन्ड्रिंग और विदेश में संपत्ति स्थानांतरण जैसी रणनीतियाँ इस मामले में भी देखने को मिल रही हैं।
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