नारायणपुर : अबूझमाड़ के लाल ने रचा इतिहास: किसान के बेटे संदेश करंगा ने छत्तीसगढ़ 10वीं बोर्ड में टॉप-10 में बनाई जगह, बनेगा IPS
admin Thu, May 8, 2025
छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित अबूझमाड़ जैसे दुर्गम इलाके से जब कोई बच्चा प्रदेश की टॉप-10 सूची में जगह बनाता है, तो यह सिर्फ़ परीक्षा की सफलता नहीं, बल्कि संघर्ष और उम्मीद की मिसाल बन जाती है।
नारायणपुर जिले के कुंदला गांव के संदेश करंगा ने छत्तीसगढ़ 10वीं बोर्ड परीक्षा 2025 में प्रदेश में 10वां स्थान पाकर पूरे अबूझमाड़ का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।
🌿 अबूझमाड़ के वनांचल से टॉप-10 में पहुंचे संदेश
गरीब आदिवासी किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले संदेश ने तेंदूपत्ता तोड़ने और खेती में हाथ बंटाने के साथ पढ़ाई में भी कमाल कर दिखाया। नारायणपुर के रामकृष्ण मिशन विद्यामंदिर आश्रम में पढ़ाई करने वाले संदेश ने विपरीत परिस्थितियों को पीछे छोड़ टॉप-10 में अपनी जगह बनाई।
👨🌾 किसान पिता की मेहनत और बेटे का सपना - बनेगा DIG अफसर
संदेश के पिता सोमारू करंगा, जो खुद चौथी तक पढ़े हैं, बेटे की कामयाबी से भावुक हैं। मां और चाची ने भी खुशी जताते हुए कहा कि अब घर के बाकी बच्चे भी संदेश से प्रेरणा लेकर पढ़ाई में आगे बढ़ेंगे।
संदेश का सपना है कि वह IPS अफसर बनकर DIG बने और अपने गांव के विकास में खुद योगदान दे।
"मैं चाहता हूं कि मेरे जैसे ग्रामीण क्षेत्रों की आवाज सरकार तक पहुंचे और मैं खुद उन समस्याओं का समाधान करूं।" — संदेश करंगा
📚 'जब बच्चे खेलते थे, मैं किताबों में डूबा रहता था'
संदेश ने बताया कि वह रोजाना खुद को अनुशासित रखते हुए पढ़ाई करता था। जहां दूसरे बच्चे खेल में व्यस्त रहते, वह अपनी किताबों के साथ समय बिताता। शिक्षक और रामकृष्ण मिशन स्कूल का सकारात्मक माहौल उसकी सफलता की कुंजी बना।
"मेरे गुरुओं का मार्गदर्शन और कठिन परिश्रम ने ही मुझे आज इस मुकाम पर पहुंचाया।" — संदेश
🎉 गांव में खुशी की लहर, मीडिया से मिली सफलता की खबर
संदेश को जब मीडिया टीम ने उसकी सफलता की खबर दी, तो वह अपने माता-पिता के साथ तेंदूपत्ता संग्रहण में व्यस्त था।
खबर मिलते ही उसकी आंखों में चमक और चेहरे पर आत्मविश्वास साफ दिखा। आज गांव में हर कोई संदेश पर गर्व कर रहा है।
🏅 संघर्ष की मिसाल बना संदेश करंगा
नक्सल प्रभावित अबूझमाड़ के सुदूर क्षेत्र से आया संदेश आज पूरे छत्तीसगढ़ में चर्चा का विषय बना है।
उसकी कहानी ये साबित करती है कि कठिनाइयां प्रतिभा की राह नहीं रोक सकतीं।
आज संदेश न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे नारायणपुर और अबूझमाड़ के लिए प्रेरणा बन गया है
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