कांकेर : कांकेर का मलांजकुडूम जलप्रपात बना पर्यटन का नया हॉटस्पॉट, तीन झरनों का संगम बना आकर्षण का केंद्र
छत्तीसगढ़ का बस्तर संभाग प्राकृतिक सौंदर्य, घने जंगलों और जलप्रपातों के लिए दुनियाभर में मशहूर है। जहां चित्रकोट और तीरथगढ़ जैसे वॉटरफॉल पहले से ही प्रसिद्ध हैं, वहीं अब कांकेर जिले का मलांजकुडूम जलप्रपात भी तेजी से पर्यटकों के बीच लोकप्रिय हो रहा है।
तीन झरनों से मिलकर बना है मलांजकुडूम जलप्रपात
कांकेर जिला मुख्यालय से सिर्फ 15 किलोमीटर दूर, यह जलप्रपात दूध नदी पर स्थित है और तीन स्तरों पर गिरता है।
पहला झरना: लगभग 65 फीट ऊंचा
दूसरा झरना: 45 फीट ऊंचा
तीसरा झरना: 25 फीट ऊंचा
तीनों झरनों के मिलन से बनने वाला यह जलप्रपात हरियाली से घिरे सुरम्य वातावरण में स्थित है और मानसून के दौरान इसका दृश्य बेहद मनमोहक हो जाता है। पर्यटकों की पहली पसंद बन रहा है मलांजकुडूम
देश-विदेश से पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं
खासकर सप्ताहांत और छुट्टियों में यहां भारी भीड़ रहती है
छात्रों, शिक्षकों और परिवारों के लिए यह एक आदर्श पिकनिक स्थल बन गया है
वन प्रबंधन समिति के सदस्य बताते हैं कि यहां पार्किंग टिकट, साफ-सफाई, और सुरक्षा का ध्यान रखा जाता है। पर्यटकों को सेल्फी लेते समय सतर्कता बरतने की सलाह दी जाती है। वन विभाग ने दी सुविधा बढ़ाने की जानकारी
मुख्य वन संरक्षक दिलराज प्रभाकर ने बताया कि
“हम मलांजकुडूम जलप्रपात क्षेत्र में पर्यटकों के लिए और सुविधाएं जोड़ने की योजना बना रहे हैं। स्थानीय लोगों को रोजगार देने के लिए वन प्रबंधन समिति को सक्रिय किया गया है।”
भविष्य में यहां पीने के पानी की बेहतर व्यवस्था, सुरक्षा के लिए बैरिकेडिंग और प्राकृतिक ट्रेल्स जैसी सुविधाएं भी शुरू की जा सकती हैं। बस्तर के प्रवेश द्वार पर प्राकृतिक जादू
मलांजकुडूम जलप्रपात को ‘बस्तर का प्रवेश द्वार’ भी कहा जाता है, क्योंकि यही मार्ग बस्तर की गहराई में ले जाता है। पर्यटक यहां रुककर इस अद्भुत झरने को देखना नहीं भूलते।
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