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: छठ महापर्व: जिले में छठी मैया की महिमा के गीतों के साथ घाटों पर उमड़ा श्रद्धालुओं का उत्साह

admin Thu, Nov 7, 2024

छठ महापर्व की रौनक अब जिले में नजर आने लगी है। घाटों को सजाकर पूरी तरह तैयार किया गया है, और हर जगह छठ के गीत गूंज रहे हैं। चार दिवसीय छठ पर्व की शुरुआत मंगलवार को ‘नहाय-खाय’ के साथ हुई, जिसमें श्रद्धालुओं ने व्रत का संकल्प लिया। बुधवार को खरना के दिन घाट बंधन के बाद भक्तों ने 36 घंटे के निर्जला व्रत का पालन शुरू कर दिया है।

छठ पूजा में खरना की परंपरा को विशेष महत्व दिया गया है। खरना का अर्थ होता है शुद्धता, और इसे छठ पूजा की सबसे पवित्र प्रक्रिया माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन छठी मैया स्वयं आती हैं और भक्तों के बीच उपस्थित रहती हैं। इसके बाद भक्तजन 36 घंटे के कठोर निर्जला व्रत की शुरुआत करते हैं। आज शाम को छठ व्रतधारी गंगा-यमुना या अन्य पवित्र नदियों के किनारे बने घाटों पर जाकर अस्ताचल सूर्य को अर्घ्य देंगे। इस महापर्व का समापन शुक्रवार की सुबह उदयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करके होगा। आज शाम रायपुर में सूर्यास्त का समय 5:24 बजे का है, जबकि कोरिया जिले में भी लगभग यही समय रहेगा। छठ पर्व के लिए शहरों से लेकर गांवों तक के घाटों पर तैयारियाँ की गई हैं। जिला के 10 मुख्य घाटों पर बड़े कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, और सभी घाटों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। सुरक्षा के लिए हर घाट पर दो-दो गोताखोर तैनात किए गए हैं। कोरिया और एमसीबी जिले के छठ घाटों पर 18-18 गोताखोरों की व्यवस्था की गई है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता मिल सके। छठ पूजा के इस पवित्र पर्व के दौरान, श्रद्धालु अपने मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए कठिन व्रत करते हैं। घाटों पर जलते दीपक, रंग-बिरंगी सजावट और गूंजते छठ गीतों से वातावरण में अद्भुत उल्लास फैल गया है। हर ओर छठी मैया की महिमा के गीत गूंज रहे हैं, और लोग इस महापर्व में आस्था और भक्ति के साथ शामिल हो रहे हैं। छठ पूजा का यह पर्व न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का भी अवसर है। सूर्य की उपासना, जल की महत्ता, और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता इस पर्व के माध्यम से व्यक्त की जाती है। इस महापर्व में सभी जाति और वर्ग के लोग एकत्रित होकर सूर्य देवता और छठी मैया का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए एकसाथ आते हैं। इस महापर्व का आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व असीमित है। यह पर्व न सिर्फ व्यक्तिगत खुशियों का माध्यम है, बल्कि समाज में भाईचारे, प्रेम और एकता का प्रतीक भी है। छठ पूजा का यह त्यौहार हर साल लोगों के बीच संबंधों को मजबूत बनाने का कार्य करता है।

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