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दंतेवाड़ा में हाई लेवल सुरक्षा बैठक : DGP अरुण देव गौतम बोले- नक्सलियों के लिए सरेंडर ही आखिरी विकल्प

Media Yodha Desk Tue, Mar 3, 2026

Chhattisgarh News : देश में लाल आतंक के खात्‍मे की डेडलाइन 31 मार्च में अब महीनेभर से भी कम समय बचा है. ऐसे में छत्तीसगढ़ पुलिस ने अब अपनी रणनीति को और तेज करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं. इसी कड़ी में सोमवार को दंतेवाड़ा के पुलिस लाइन कारली में बस्तर संभाग स्तर की एक अहम और हाई लेवल बैठक आयोजित की गई. बैठक लेने छत्तीसगढ़ के डीजीपी अरुण देव गौतम पहु्ंचे थे, जिसमें नक्सल ऑपरेशन से जुड़े वरिष्ठ पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के अधिकारी शामिल हुए. बैठक में एडीजी नक्सल ऑप्स विवेकानंद सिन्हा, बस्तर आईजी सुंदरराज पी, बस्तर संभाग के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षक, सीआरपीएफ तथा अन्य पैरामिलिट्री फोर्स के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. करीब चार घंटे तक चली इस बैठक में नक्सल विरोधी अभियान की वर्तमान स्थिति, खुफिया जानकारी, ऑपरेशन की रणनीति और आगामी कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई. सूत्रों के अनुसार, नक्सल उन्मूलन की तय समयसीमा 31 मार्च नजदीक आने के कारण सुरक्षा बलों को अभियान और तेज करने के निर्देश दिए गए हैं.

बैठक में विशेष रूप से फील्ड स्तर पर किए गए कार्यों की समीक्षा की गई और यह आकलन किया गया कि अब तक कितनी सफलता मिली है तथा किन क्षेत्रों में अभी कार्रवाई की जरूरत है. बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए डीजीपी अरुण देव गौतम ने कहा कि पहले इस तरह की समीक्षा बैठक रायपुर में आयोजित होती थी, लेकिन अब फील्ड की वास्तविक स्थिति समझने के लिए इसे बस्तर में आयोजित किया गया है. उन्होंने बताया कि नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बलों द्वारा किए जा रहे कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई है और आगामी दिनों के लिए नई रणनीति तैयार की गई है. डीजीपी ने नक्सलियों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि उनके लिए आत्मसमर्पण का रास्ता हमेशा खुला हुआ है.

उन्होंने कहा कि अब नक्सलियों के पास ज्यादा समय नहीं बचा है और सरेंडर के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है. जो नक्सली समय रहते आत्मसमर्पण करेंगे, उन्हें सरकार की पुनर्वास नीति के तहत बेहतर और सुरक्षित जीवन का अवसर मिलेगा. उन्होंने नक्सलियों से अपील करते हुए कहा कि वे अपने परिवार, समाज और अपने भविष्य को ध्यान में रखते हुए हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटें. आत्मसमर्पण ही उनके लिए सबसे बेहतर और सुरक्षित रास्ता है. बैठक के बाद माना जा रहा है कि बस्तर क्षेत्र में आने वाले दिनों में नक्सल विरोधी अभियान और अधिक तेज और प्रभावी रूप में देखने को मिल सकता है.

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