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छत्तीसगढ़ विधानसभा में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पेश : कांग्रेस ने उठाई प्रवर समिति में भेजने की मांग

Media Yodha Desk Thu, Mar 19, 2026

रायपुर : छत्तीसगढ़ विधानसभा में गुरुवार को उस समय राजनीतिक माहौल गरमा गया, जब गृह मंत्री विजय शर्मा ने 'छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026' सदन में पेश किया। विधेयक पेश होते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस शुरू हो गई, जो बाद में विपक्ष के बहिष्कार तक पहुंच गई। नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि इसी तरह के मामलों पर पहले से ही कई राज्यों में कानूनी विवाद चल रहा है और वे मामले सर्वोच्च न्यायालय में लंबित हैं। ऐसे में इस विधेयक पर सीधे चर्चा करने के बजाय इसे पहले विधानसभा की प्रवर समिति को भेजा जाना चाहिए।

हालांकि सत्ता पक्ष ने इस आपत्ति को खारिज करते हुए कहा कि विधेयक पूरी तरह विधिसम्मत है और इसे सदन में पेश करने में कोई बाधा नहीं है। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने भी स्पष्ट किया कि कानून बनाने का अधिकार राज्य सरकार को है और इसमें किसी प्रकार की संवैधानिक अड़चन नहीं है। गृह मंत्री विजय शर्मा ने भी विपक्ष के तर्कों का जवाब देते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय की ओर से ऐसा कोई निर्देश या रोक नहीं है, जो नए कानून बनाने से राज्य को रोकती हो। उन्होंने कहा कि विधेयक को लाने से पहले आवश्यक फीडबैक लिया गया है और सभी को इस पर सकारात्मक चर्चा करनी चाहिए।

आसंदी द्वारा विपक्ष की मांग को खारिज किए जाने के बाद स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। नाराज विपक्ष ने विधेयक पर चर्चा में भाग लेने से इनकार कर दिया और पूरे दिन के लिए सदन की कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया। इस घटनाक्रम के बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नारेबाजी भी देखने को मिली। सत्ता पक्ष के विधायकों ने विपक्ष पर गंभीर मुद्दों से बचने का आरोप लगाया, जबकि विपक्ष ने भी विरोध जताते हुए सदन से बाहर निकलकर अपनी नाराजगी दर्ज कराई। पूरे घटनाक्रम ने स्पष्ट कर दिया कि धर्म स्वातंत्र्य विधेयक को लेकर राजनीतिक सहमति बनना फिलहाल आसान नहीं है और आने वाले दिनों में इस पर बहस और तेज हो सकती है।

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