छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में बड़ी राहत : पूर्व IAS अनिल टुटेजा को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत
सुप्रीम कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में दी जमानत
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व IAS अधिकारी अनिल टुटेजा को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है। जस्टिस अभय एस. ओका और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने यह निर्णय सुनाया। कोर्ट ने यह जमानत टुटेजा के एक साल से अधिक समय से जेल में रहने के आधार पर दी है।
ईडी ने 2024 में किया था गिरफ्तार
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अनिल टुटेजा को 21 अप्रैल 2024 को गिरफ्तार किया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें कड़ी शर्तों के साथ जमानत दी है, जिनमें पासपोर्ट जमा करना और सुनवाई के दौरान कोर्ट के साथ सहयोग करना शामिल है।
ईडी ने जताया विरोध, लगाए गंभीर आरोप
ईडी की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता एस.वी. राजू ने जमानत का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि अनिल टुटेजा एक वरिष्ठ अधिकारी हैं और वह बड़े स्तर के भ्रष्टाचार में शामिल रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने गवाहों को प्रभावित करने की भी आशंका जताई। राजू ने टुटेजा को नागरिक आपूर्ति निगम घोटाले में भी लिप्त बताया।
क्या है छत्तीसगढ़ शराब घोटाला?
इस मामले की जड़ें 11 मई 2022 की उस याचिका से जुड़ी हैं, जो आयकर विभाग ने दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि छत्तीसगढ़ में रिश्वत और अवैध वसूली का संगठित नेटवर्क चल रहा था, जिसमें तत्कालीन CM सचिवालय की उप सचिव सौम्या चौरसिया, अनिल टुटेजा और उनके बेटे यश टुटेजा शामिल थे।
इस याचिका के आधार पर ईडी ने 18 नवंबर 2022 को मामला दर्ज किया और जांच शुरू की। आयकर विभाग से मिले दस्तावेजों और आरोपी से पूछताछ के आधार पर ईडी ने कोर्ट में ₹2161 करोड़ के घोटाले का दावा करते हुए चार्जशीट दाखिल की है।
निष्कर्ष (Conclusion):
छत्तीसगढ़ का यह शराब घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग केस प्रदेश के सबसे बड़े घोटालों में से एक माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट से अनिल टुटेजा को मिली जमानत से उन्हें अस्थायी राहत तो जरूर मिली है, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच और कानूनी प्रक्रिया अब भी जारी रहेगी।
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