बिलासपुर : अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में कुलपति के कार्यकाल में हुई अनियमितताओं की उच्च स्तरीय जांच की मांग
कुलपति प्रो वाजपेई का कार्यकाल समाप्ति पर नियमानुसार कमिश्नर को ही प्रभार देने छात्रों की मंत्री से मांग, साथ ही कुलपति के कार्यकाल में अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में हुए गंभीर अनियमितताओं व पूर्व विवादास्पद रिकॉर्ड(संपूर्ण कार्यकाल) की भी उच्च स्तरीय जांच की मांग की।
प्रदेश के प्रतिष्ठित अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, बिलासपुर में कुलपति प्रो एडीएन वाजपेई का कार्यकाल इसी माह समाप्त हो रहा है उनके विवादास्पद रिकॉर्ड को देखते हुए नए कुलपति चयन तक कुलपति का प्रभार नियमानुसार संभागायुक्त को देने तथा लंबे समय से जारी भर्ती, वित्तीय, प्रशासनिक एवं निर्माण कार्यों में गंभीर अनियमितताओं, भ्रष्टाचार एवं तानाशाहीपूर्ण कार्यशैली पर कारवाई को करने को लेकर छात्र-छात्राओं के प्रतिनिधिमंडल ने उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा को रायपुर निवास में मिल विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री महोदय को बताया कि विश्वविद्यालय में कुलपति के वर्तमान कार्यकाल के दौरान शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक पदों पर भर्ती में भारी अनियमितताएं की गई हैं। आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव रखते हुए नियमों की अनदेखी कर चहेते व्यक्तियों को लाभ पहुंचाया गया, आरक्षण रोस्टर में हेरफेर किया गया तथा स्क्रूटनी एवं चयन प्रक्रिया में मनमानी की गई, जो शासन एवं यूजीसी के नियमों का खुला उल्लंघन है।
ज्ञापन में विश्वविद्यालय में हुए वित्तीय दुरुपयोग को भी प्रमुखता से उठाया गया। आरोप है कि विश्वविद्यालय के धन का उपयोग शैक्षणिक विकास के बजाय व्यक्तिगत प्रचार के लिए किया गया, जिसमें होर्डिंग, कैलेंडर एवं अन्य प्रचार सामग्री पर लाखों रुपए खर्च किए गए। इसके अतिरिक्त कुलपति कार्यालय एवं कुलपति निवास के मेंटेनेंस, यात्रा व्यय एवं अन्य मदों में संदिग्ध भुगतान किए गए, जिसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
छात्रों ने बताया कई निर्माण एवं निविदा कार्यों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का भी आरोप लगाया। बताया गया कि डॉ शैलेंद्र दुबे के कार्यकाल में कार्यों को टुकड़ों में विभाजित कर कोटेशन के माध्यम से चहेते फर्मों को लाभ पहुंचाया गया। विश्वविद्यालय में एल्युमिनियम पार्टिशन, लैंग्वेज लैब निर्माण,पार्किंग, शोध कक्ष को तोड़कर पुनर्निर्माण, कैंटीन निर्माण सहित कई कार्यों में लाखों से करोड़ों रुपए खर्च किए गए, लेकिन इन कार्यों में पारदर्शिता नहीं रखी गई और नियमों की अनदेखी की गई।
छात्रों ने यह भी बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की शिकायतों पर कार्रवाई करने के बजाय आवाज उठाने वाले छात्रों पर दमनात्मक कार्रवाई करता है। अपने कर्मचारियों को मनमाने ढंग से हटाना जैसे कदम विश्वविद्यालय के लोकतांत्रिक वातावरण को समाप्त कर रहे हैं। इनके द्वारा दो संस्थानों से एक साथ पेंशन तथा सैलरी ली गई है जिसका नियमानुसार समायोजन नहीं कराया गया जो यूजीसी के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।* छात्र नेता सूरज सिंह राजपूत ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में वर्तमान में व्याप्त अनियमितताएं अत्यंत गंभीर हैं और इससे विश्वविद्यालय की साख एवं छात्रों का भविष्य खतरे में है। प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री को यह भी अवगत कराया कि कुलपति का पूर्व कार्यकाल भी विवादों से घिरा रहा है। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा में कुलपति रहते हुए उनके खिलाफ वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगे थे, जिनकी जांच के बाद उन्हें पद से हटाया गया था। इसी प्रकार हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला में उनके कार्यकाल के दौरान भी भर्ती, परीक्षा एवं प्रशासनिक मामलों में गंभीर विवाद सामने आए थे तथा छात्र आंदोलनों और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर उनका कार्यकाल लगातार विवादों में रहा।
छात्रों ने कहा कि पूर्व में विवादास्पद रिकॉर्ड होने के बावजूद अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में भी उसी प्रकार की अनियमितताओं की पुनरावृत्ति होना अत्यंत गंभीर विषय है और इसकी उच्च स्तरीय जांच होना आवश्यक है।
प्रतिनिधिमंडल उच्च शिक्षा मंत्री से मांग की -
* अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में भर्ती, वित्तीय एवं प्रशासनिक कार्यों की उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच कराई जाए।
* निर्माण एवं निविदा कार्यों में हुए भ्रष्टाचार की विस्तृत जांच पर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
* पूर्व के जांच उपरांत प्रेषित प्रतिवेदनों पर त्वरित कार्यवाही की जाएं।
* विश्वविद्यालय की पारदर्शिता एवं शैक्षणिक वातावरण को पुनः स्थापित किया जाए।
* कुलपति के पूरे कार्यकाल एवं पूर्व विवादास्पद रिकॉर्ड की समग्र जांच कर उचित निर्णय लिया जाए। उच्च शिक्षा मंत्री ने छात्रों के प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि ज्ञापन में उठाए गए बिंदुओं का गंभीरता से परीक्षण कर निर्णय लिया जाएगा। कुलपति का कार्यकाल समाप्ति पर नियमानुसार संभागायुक्त को प्रभार देने मंत्री वर्मा से मांग, कुलपति के पूर्व विवादास्पद रिकॉर्ड को देखते हुए संपूर्ण कार्यकाल के उच्च स्तरीय जांच की मांग हुई।write something...
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