रायपुर : भानपुरी में गरीबों के आशियाने पर संकट, कांग्रेस ने बुलडोजर कार्रवाई को बताया राजनीतिक साजिश
रायपुर के नकटी इलाके में गरीबों के घर तोड़े जाने की गूंज अभी थमी भी नहीं थी कि अब बस्तर के भानपुरी क्षेत्र में गरीब परिवारों के मकानों पर बुलडोजर चलाने की तैयारी ने विवाद खड़ा कर दिया है। सिवनी ग्राम पंचायत में पिछले कई वर्षों से रह रहे गरीब परिवारों के मकान तोड़ने पहुंचे तहसीलदार लकिराम पांडे को पूर्व विधायक चंदन कश्यप और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के विरोध के चलते जेसीबी वापस ले जानी पड़ी।
🏚️ गरीबों को मकान खाली करने का अल्टीमेटम
तहसीलदार ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह जमीन हायर सेकेंडरी स्कूल और हॉस्टल से जुड़ी सरकारी भूमि है, जिस पर 10-12 परिवारों ने अवैध कब्जा कर मकान बना लिए हैं। उन्हें कई बार नोटिस देकर जमीन खाली करने को कहा गया, लेकिन वे हटे नहीं, इसलिए अब कार्रवाई की जा रही है।
हालांकि, अधिकारियों ने फिलहाल कुछ और दिन का समय देकर अंतिम चेतावनी दी है।
🛑 कांग्रेस का विरोध, आंदोलन की चेतावनी
पूर्व विधायक चंदन कश्यप ने इसे वन मंत्री केदार कश्यप की साजिश और दादागीरी करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह जमीन पंचायत द्वारा इन गरीबों को प्रस्तावित की गई थी, और भाजपा सरकार अब उन्हें कांग्रेस समर्थक बताकर जबरन उजाड़ रही है।
“गरीबों के आशियाने छिनने से पहले सरकार को सोच लेना चाहिए कि ये लोग कहां जाएंगे। यह सिर्फ प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, एक सुनियोजित राजनीतिक साजिश है।”
– चंदन कश्यप, पूर्व विधायक
कांग्रेस ने ऐलान किया है कि यदि कार्रवाई नहीं रोकी गई तो वह जल्द ही तहसील कार्यालय का घेराव और आंदोलन करेगी।
🧾 सभी पर समान कार्रवाई की मांग
पूर्व विधायक ने यह भी मांग की कि भानपुरी तहसील के अंतर्गत सभी ग्राम पंचायतों में राजस्व भूमि पर बने मकानों का सर्वे कराया जाए और अगर कार्रवाई करनी है, तो सभी पर समान रूप से की जाए, ताकि भेदभाव न हो।
📣 क्या बोले तहसीलदार?
तहसीलदार लकिराम पांडे ने कहा:
“यह सरकारी भूमि है, जिस पर अतिक्रमण कर मकान बनाए गए हैं। कई बार नोटिस देने के बाद भी मकान खाली नहीं किए गए। अब कार्रवाई की जा रही है। कुछ दिन की मोहलत और दी गई है, इसके बाद मकान तोड़े जाएंगे।”
🧭 मामला गर्म, राजनीतिक तकरार तेज
कांग्रेस इसे भाजपा की गरीब विरोधी मानसिकता बता रही है।
प्रशासन इसे सरकारी जमीन पर अतिक्रमण हटाने की कानूनी कार्रवाई मान रहा है।
इस मुद्दे ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है और आने वाले दिनों में आंदोलन और घेराव के संकेत मिल रहे हैं
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