: बिहार कोकिला शारदा सिन्हा का निधन: छठ महापर्व के पहले ही दिन पूरे देश में शोक की लहर
admin Thu, Nov 7, 2024
मशहूर लोकगायिका और बिहार कोकिला के नाम से प्रसिद्ध शारदा सिन्हा का मंगलवार रात निधन हो गया। उनकी मृत्यु से संगीत जगत से लेकर राजनीतिक हस्तियों तक पूरे देश में शोक की लहर है। छठ महापर्व के पहले ही दिन, जब उन्होंने छठी मैया के गीतों में अपनी आवाज़ दी थी, उस समय उनकी मृत्यु की खबर ने सभी को स्तब्ध कर दिया। शारदा सिन्हा पिछले काफी समय से बोन मैरो कैंसर से जूझ रही थीं और उनका इलाज चल रहा था। 5 नवंबर 2024 को, छठ पर्व की शुरुआत के दिन, अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। खासकर बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश में उनके निधन से गहरा शोक छा गया है।
छठ महापर्व और शारदा सिन्हा का अटूट संबंध शारदा सिन्हा का नाम छठ महापर्व के साथ गहराई से जुड़ा हुआ था। उनके गीतों में छठी मैया की महिमा इतनी सुंदरता से उभरती थी कि हर साल छठ घाटों पर उनके गीत गूंजते रहते हैं। उनकी मधुर आवाज़ में गाए गए छठ के गीत सुनकर लोग भावुक हो जाते थे और छठी मैया के प्रति अपनी आस्था को और भी गहराई से महसूस करते थे। उनकी आवाज़ में "पहिले-पहिले हम कइनी छठी मैया तोहार पूजन" जैसे गीत हर वर्ष छठ के अवसर पर लोगों की जुबां पर रहते थे। उनके गीतों ने छठ महापर्व को एक अलग ही आयाम दिया है। बिहार कोकिला की उपलब्धियां शारदा सिन्हा को उनकी अनमोल गायकी के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया, जिसमें पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे सम्मान शामिल हैं। उनके योगदान ने न केवल बिहार के लोक संगीत को एक नई ऊंचाई दी, बल्कि इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान दिलाई। उन्होंने बॉलीवुड में भी अपनी आवाज़ का जादू बिखेरा और अपने गायन के जरिए देशभर के संगीत प्रेमियों के दिलों में अपनी जगह बनाई। उनकी आवाज़ में भोजपुरी और मैथिली के पारंपरिक गीतों ने भारतीय लोक संगीत को एक नई पहचान दी। नकटा तालाब का नाम अब होगा 'शारदा सरोवर' शारदा सिन्हा के निधन से शोकाकुल वैषाली नगर के विधायक राकेश सेन ने अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए उनकी स्मृति में एक बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने घोषणा की है कि कुरुद का प्रसिद्ध नकटा तालाब अब "शारदा सरोवर" के नाम से जाना जाएगा। बुधवार को विधायक राकेश सेन स्वयं कुरुद पहुंचे और नकटा तालाब का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि शारदा सिन्हा ने बिहार के लोक संगीत को जो पहचान दिलाई है, वह अतुलनीय है और इस तालाब का नामकरण उनके सम्मान में किया जाना एक उचित श्रद्धांजलि होगी। लोकगायिका के प्रति देशभर में श्रद्धांजलि शारदा सिन्हा का जाना संगीत प्रेमियों के लिए एक बड़ी क्षति है। उनके निधन से केवल बिहार और उत्तर भारत ही नहीं, बल्कि पूरे देश में एक खालीपन महसूस किया जा रहा है। उनकी आवाज़ में वह खासियत थी जो किसी के भी दिल को छू जाती थी। उनके जाने से छठ महापर्व की परंपरा में एक अधूरापन आ गया है, जिसे कोई और पूरा नहीं कर सकता। हर व्यक्ति जिसने उनकी आवाज़ में छठ गीतों को सुना है, वह उनकी कमी को गहराई से महसूस कर रहा है। छठ घाटों पर गूंजते रहेंगे शारदा सिन्हा के गीत शारदा सिन्हा की मधुर आवाज़ हमेशा के लिए हमारे बीच नहीं रही, लेकिन उनकी धरोहर के रूप में उनके गीत हमेशा छठ घाटों पर गूंजते रहेंगे। उनकी मधुर धुनें और गीतों की भावनात्मक गहराई उनके प्रशंसकों के दिलों में सदैव जीवित रहेगी। छठ पर्व के दौरान उनकी आवाज़ में गाए गए गीत उनके प्रति श्रद्धांजलि के रूप में बजते रहेंगे, और लोग उनकी स्मृति को संजोए रहेंगे। शारदा सिन्हा के गीतों में जो सादगी और भक्ति थी, वह न केवल छठ पर्व बल्कि भारतीय लोक संस्कृति का भी प्रतीक बन चुकी है। उनके योगदान और उनकी स्मृतियों को संजोए रखते हुए, लोग इस महान लोकगायिका की कमी को गहराई से महसूस करेंगे। उनके जाने से छठ पर्व का यह साल उनके प्रशंसकों के लिए और भी भावुक हो गया है।विज्ञापन
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