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: छत्तीसगढ़: मत्स्य पालन क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि, कांकेर जिले को 'सर्वश्रेष्ठ अंतर्देशीय जिला' पुरस्कार

admin Wed, Nov 20, 2024

छत्तीसगढ़ ने एक बार फिर मत्स्य पालन के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी सफलता हासिल की है। कांकेर जिला देश का 'सर्वश्रेष्ठ अंतर्देशीय जिला' चुना गया है। यह प्रतिष्ठित पुरस्कार कांकेर जिले को विश्व मत्स्य दिवस के अवसर पर 21 नवंबर को प्रदान किया जाएगा। इस विशेष कार्यक्रम का आयोजन नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में किया जाएगा, जहां केंद्रीय मत्स्य, पशुपालन, डेयरी और पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह इस सम्मान को प्रदान करेंगे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कांकेर जिला प्रशासन, मत्स्य पालन विभाग के अधिकारियों और राज्य के सभी मछुआरों को बधाई दी है। मुख्यमंत्री ने कहा, "छत्तीसगढ़ जैसे भूमि से घिरे राज्य का देश में मत्स्य पालन में अग्रणी होना हमारे मछुआरों की मेहनत का परिणाम है। हमारा राज्य न केवल मछली बीज उत्पादन में आत्मनिर्भर है, बल्कि इसे अन्य राज्यों को भी निर्यात कर रहा है।"  मछली पालन में अग्रणी राज्य छत्तीसगढ़ जैसे भू-आवेष्ठित राज्य ने मत्स्य पालन के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है। देश में मछली बीज उत्पादन में छत्तीसगढ़ छठवें स्थान पर है। यहां कुल 1,29,039 जल स्रोत हैं, जिनका जल क्षेत्र 2.032 लाख हेक्टेयर में फैला है। इनमें से 96% जल क्षेत्र में किसी न किसी रूप में मत्स्य पालन किया जा रहा है। इसके अलावा, राज्य में 3571 किलोमीटर लंबा नदी जल क्षेत्र भी है। मत्स्य पालन को और बढ़ावा देने के लिए राज्य में नए जल क्षेत्र बनाए जा रहे हैं। अब तक 6783 हेक्टेयर नया जल क्षेत्र तैयार किया गया है। मछली बीज उत्पादन में आत्मनिर्भरता पहले छत्तीसगढ़ को मछली बीज के लिए पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। राज्य में कुल 115 हैचरियों के माध्यम से हर साल 546 करोड़ मछली बीज का उत्पादन हो रहा है। इनमें से 82 नई हैचरियां हाल ही में स्थापित की गई हैं। इस प्रगति के कारण छत्तीसगढ़ अब मछली बीज के मामले में आत्मनिर्भर हो गया है और इसे अन्य राज्यों को भी निर्यात कर रहा है। मछली उत्पादन में छत्तीसगढ़ का योगदान छत्तीसगढ़ हर साल 7.30 लाख टन मछली का उत्पादन कर रहा है, जिससे यह देश में अंतर्देशीय मछली उत्पादन में आठवें स्थान पर है। अतिरिक्त मछली उत्पादन के लिए राज्य में 9551 केज, 415 बायोफ्लोक, 6 आरएएस सिस्टम और 253 बायोफ्लोक तालाब बनाए गए हैं। मत्स्य पालन को प्रोत्साहन राज्य में रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और जांजगीर में  थोक मछली बाजार स्थापित किए गए हैं। इसके साथ ही, एनएफडीपी योजना के तहत मछुआरों का पंजीकरण किया जा रहा है। मत्स्य पालकों को किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से ऋण सुविधा प्रदान की जा रही है। योग्य मछुआरों को  1% से 3% ब्याज दर पर अल्पकालिक ऋण  भी दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ की मत्स्य पालन की सफलता का राज छत्तीसगढ़ की यह उपलब्धि मछुआरों की मेहनत, प्रशासन की योजनाओं और जल स्रोतों के कुशल उपयोग का परिणाम है। कांकेर जिले को 'सर्वश्रेष्ठ अंतर्देशीय जिला' पुरस्कार मिलना पूरे राज्य के लिए गर्व का विषय है। यह छत्तीसगढ़ की मत्स्य पालन में अग्रणी भूमिका और उसकी आत्मनिर्भरता को प्रमाणित करता है। छत्तीसगढ़ की यह उपलब्धि न केवल राज्य को नई ऊंचाइयों पर ले जा रही है, बल्कि अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रेरणा बन रही है।

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