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: "70 वर्षीय रेखा सेन ने मलेशिया में जीते दो पदक, बस्तर का नाम रोशन किया"

admin Mon, Oct 21, 2024

बस्तर में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, और इसका सबसे ताज़ा उदाहरण 70 वर्षीया रेखा सेन हैं, जिन्होंने मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में आयोजित 'मलेशियाई अंतरराष्ट्रीय ओपन मास्टर्स एथलेटिक्स चैंपियनशिप' में भारत के लिए दो पदक जीते हैं। रेखा सेन ने शॉटपुट और डिस्कस थ्रो में हिस्सा लेकर यह सफलता हासिल की, जिसमें उन्होंने शॉटपुट में रजत पदक और डिस्कस थ्रो में कांस्य पदक अपने नाम किया।

यह प्रतियोगिता 12 और 13 अक्टूबर को कुआलालंपुर में आयोजित हुई थी, जिसमें चीन, श्रीलंका, सिंगापुर, फिलीपींस, हांगकांग, पाकिस्तान, थाईलैंड, ब्रुनेई, इंडोनेशिया, न्यूजीलैंड और उज्बेकिस्तान जैसे देशों के खिलाड़ियों ने भाग लिया था। रेखा सेन ने 70 वर्ष की उम्र में भी अद्वितीय प्रदर्शन करते हुए इन देशों के खिलाड़ियों को हराया और देश का नाम रोशन किया। खास बात यह है कि रेखा सेन इस दौरान चोटिल हो गई थीं, फिर भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन कर यह मुकाम हासिल किया। रेखा सेन जगदलपुर की निवासी हैं और उन्होंने अपनी इस विजय से बस्तर के साथ-साथ पूरे देश को गौरवान्वित किया है। इससे पहले भी उन्होंने नेपाल में आयोजित प्रतियोगिता में तीन स्वर्ण पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया था। इसके अलावा, 2024 में हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में हुई प्रतियोगिता में उन्होंने दो रजत और एक कांस्य पदक जीता था। खेल दिवस के अवसर पर वर्ष 2020 में उन्हें सम्मानित किया गया था।

रेखा सेन ने अपने करियर की शुरुआत एक शिक्षक के रूप में की थी, लेकिन खेलों के प्रति उनकी रुचि धीरे-धीरे बढ़ती गई। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ वेटरन एथलेटिक्स एसोसिएशन से जुड़कर अपने खेल जीवन को फिर से शुरू किया। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उनके जीवन में 2013 में उनके पति के निधन के बाद वह मानसिक रूप से बहुत टूट गई थीं, लेकिन उन्होंने अपने खेल प्रतिभा को फिर से जीवंत किया और कई मंचों पर खुद को साबित किया।

रेखा सेन की संघर्ष और सफलता की कहानी हर किसी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। बस्तर के लोग गर्व महसूस कर रहे हैं कि रेखा सेन ने अपनी लगन और मेहनत से पूरे विश्व में बस्तर का नाम ऊंचा किया है। समाज के ताने सुनने के बावजूद उन्होंने खेल में अपने जुनून को नहीं छोड़ा और अपनी काबिलियत को देश-विदेश में साबित किया। आज वह छत्तीसगढ़ और देश दोनों के लिए गर्व का कारण बनी हुई हैं और चैंपियन के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं।  

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