महंगाई में राहत की खबर : WPI में गिरावट, CPI भी 5 साल के निचले स्तर पर
admin Wed, May 14, 2025
नई दिल्ली: देश की अर्थव्यवस्था और आम जनता के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा बुधवार को जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, भारत की थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर अप्रैल 2025 में घटकर महज 0.85% रह गई है। मार्च 2025 में यह दर 2.05% थी। यह गिरावट मुख्य रूप से ईंधन, बिजली और प्राथमिक वस्तुओं की कीमतों में कमी के कारण दर्ज की गई है।
WPI में गिरावट के पीछे क्या हैं कारण?
WPI का इस्तेमाल उत्पादन स्तर पर मुद्रास्फीति को मापने के लिए किया जाता है और यह कृषि, खनन और विनिर्माण क्षेत्रों में वस्तुओं की थोक कीमतों को ट्रैक करता है। अप्रैल महीने में हुई गिरावट में सबसे अधिक योगदान ईंधन और बिजली खंड से आया है, जहां वैश्विक और घरेलू दोनों स्तरों पर कीमतों में नरमी देखी गई।
हालांकि, इसके विपरीत विनिर्माण क्षेत्र (Manufacturing Sector) ने मजबूती दिखाई है। कई प्रमुख उत्पादों जैसे कि खाद्य उत्पाद, केमिकल्स और केमिकल उत्पाद, अन्य परिवहन उपकरण और मशीनरी की कीमतों में वृद्धि दर्ज की गई, जिससे इस क्षेत्र में लचीलापन बना रहा।
CPI: खुदरा महंगाई भी रिकॉर्ड स्तर पर गिरी
सिर्फ थोक मूल्य ही नहीं, बल्कि आम लोगों के लिए राहत की एक और खबर आई है। खुदरा महंगाई दर (CPI) भी अप्रैल 2025 में बड़ी गिरावट के साथ 3.16% पर पहुंच गई, जो जुलाई 2019 के बाद से सबसे निम्न स्तर है। मंगलवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, यह गिरावट खाद्य पदार्थों की कीमतों में गिरावट के कारण हुई है।
गौरतलब है कि भीषण गर्मी के बावजूद अच्छी फसल और आपूर्ति की स्थिरता के चलते सब्जियां, दालें, फल, मांस और मछली जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भारी कमी देखी गई है। व्यक्तिगत देखभाल उत्पादों की कीमतें भी स्थिर बनी रही हैं।
क्या है CPI और WPI का महत्व?
WPI (Wholesale Price Index) बड़े पैमाने पर बेची जाने वाली वस्तुओं की कीमतों में औसत परिवर्तन को मापता है। यह विशेष रूप से उत्पादकों और व्यापारियों के दृष्टिकोण से महंगाई को आंकने का जरिया है।
वहीं CPI (Consumer Price Index) सीधे उपभोक्ताओं द्वारा उपयोग किए जाने वाले उत्पादों की कीमतों में बदलाव को दिखाता है, जो आम जनता के जीवनस्तर और खर्च को प्रभावित करता है।
आर्थिक नीतियों के लिए संकेत
WPI और CPI दोनों के गिरते आंकड़े भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को भी मौद्रिक नीति (Monetary Policy) के फैसलों में लचीलापन देने का संकेत दे सकते हैं। महंगाई दर नियंत्रित रहने से ब्याज दरों में कटौती की संभावनाएं बढ़ सकती हैं, जिससे लोन, होम लोन और निवेश पर सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है।
📈 निष्कर्ष:
अप्रैल 2025 में CPI और WPI दोनों में आई बड़ी गिरावट भारत की अर्थव्यवस्था और उपभोक्ताओं दोनों के लिए राहत की खबर है। ईंधन, बिजली और खाद्य पदार्थों की कीमतों में गिरावट से महंगाई नियंत्रित हुई है, जिससे भविष्य में आर्थिक स्थिरता की उम्मीद की जा रही है।
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