कोरबा (छत्तीसगढ़): : कोरबा के तेंदूपत्ते की चमक देशभर में: संग्राहकों को मिलेगा दोगुना दाम
कड़ी धूप में मेहनत कर हरा सोना यानी तेंदूपत्ता संग्रहण करने वाले ग्रामीणों के लिए इस बार बड़ी खुशखबरी है। राज्य सरकार ने तेंदूपत्ता के प्रति मानक बोरे की सरकारी दर 5,500 रुपये तय की है, लेकिन शानदार क्वॉलिटी के कारण कोरबा वन मंडल की 36 समितियों में लेमरू और विमलता के तेंदूपत्ते 11,000 रुपये प्रति मानक बोरी में नीलाम हुए हैं। इसका सीधा लाभ मेहनती संग्राहकों को मिलेगा, जिन्हें इस बार दोगुना दाम मिलने वाला है।
🍃 वास्तव में ‘हरा सोना’ है तेंदूपत्ता
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के घने और समृद्ध जंगलों में उगने वाला तेंदूपत्ता अपनी बेहतरीन क्वॉलिटी के लिए देशभर में मशहूर है। यही वजह है कि यहां के पत्तों की भारी मांग रहती है। मार्च के पहले सप्ताह में ही वन विभाग द्वारा शाखाओं की कटाई-छंटाई शुरू कर दी जाती है और अप्रैल के अंत से लेकर मई की शुरुआत तक कोमल पत्तों का संग्रहण जोरों पर होता है।
तेंदूपत्ते का मुख्य उपयोग बीड़ी उद्योग में होता है, जिससे हजारों परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है।
📈 बेहतर दाम का सीधा फायदा ग्रामीणों को
5,500 रुपये तय सरकारी दर।
11,000 रुपये तक नीलामी दर प्राप्त।
दोगुना आय का लाभ सीधे संग्राहकों को।
राज्य सरकार के इस प्रयास से न सिर्फ ग्रामीणों को अधिक आमदनी होगी, बल्कि जंगलों से जुड़ी अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। यह पहल ग्रामीणों के जीवन स्तर को सुधारने में एक बड़ा कदम साबित होगी।
🌳 कोरबा के तेंदूपत्ते की खासियत
कोरबा के तेंदूपत्ते का आकार बड़ा और बनावट मजबूत होती है।
कम समय में सुखाने और टिकाऊपन के कारण बीड़ी उद्योग के लिए आदर्श।
प्राकृतिक रूप से उगने के कारण इसमें रसायनिक दखल बेहद कम होता है।
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